वारेन एंडरसन का निधन

वाशिंगटन | एजेंसी: भोपाल गैस त्रासदी के खलनायक वारेन एंडरसन का निधन का बुधवार को निधन हो गया. यह जानकारी शुक्रवार को मीडिया की खबरों से सामने आई. वह 92 साल के थे. उनके निधन ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की यादें ताजा कर दी है. गौरतलब है कि भोपाल गैस त्रासदी के बाद वारेन एंडरसन भारत से भाग गये थे. उल्लेखनीय है कि उस समय छत्तीसगढ़ अलग राज्य नहीं बना था तथा मध्य प्रदेश का हिस्सा था.

‘न्यूयार्क टाइम्स’ के अनुसार, फ्लोरिडा के वेरो बीच स्थित एक स्वास्थ्य केंद्र में 29 सितंबर को उनका निधन हो गया.


उनके निधन की खबर की जानकारी हालांकि, उनके परिवार ने नहीं दी है. इसकी पुष्टि सरकारी रिकार्ड से हुई है.

भोपाल गैस काण्ड
भारत के मध्य प्रदेश राज्य के भोपाल शहर मे 3 दिसम्बर सन् 1984 को एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई. इसे भोपाल गैस कांड, या भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है. भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कंपनी के कारखाने से एक ज़हरीली गैस का रिसाव हुआ जिससे लगभग 15,000 से अधिक लोगो की जान गई तथा बहुत सारे लोग अनेक तरह की शारीरिक अपंगता से लेकर अंधेपन के भी शिकार हुए.

भोपाल गैस काण्ड में मिथाइलआइसोसाइनाइट, मिक नामक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था. जिसका उपयोग कीटनाशक बनाने के लिए किया जाता था.

मरने वालों के अनुमान पर विभिन्न स्त्रोतों की अपनी-अपनी राय होने से इसमें भिन्नता मिलती है. फिर भी पहले अधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या 2,259 थी. मध्यप्रदेश की तत्कालीन सरकार ने 3,787 की गैस से मरने वालों के रुप में पुष्टि की थी. अन्य अनुमान बताते हैं कि 8,000 लोगों की मौत तो दो सप्ताहों के अंदर हो गई थी और लगभग अन्य 8,000 लोग तो रिसी हुई गैस से फैली संबंधित बीमारियों से मारे गये थे.

2006 में सरकार द्वारा दाखिल एक शपथ पत्र में माना गया था कि रिसाव से करीब 5,58,125सीधे तौर पर प्रभावित हुए और आंशिक तौर पर प्रभावित होने की संख्या लगभग 38,478 थी. 3900 तो बुरी तरह प्रभावित हुए एवं पूरी तरह अपंगता के शिकार हो गये.

भोपाल गैस त्रासदी को लगातार मानवीय समुदाय और उसके पर्यावास को सबसे ज़्यादा प्रभावित करने वाली औद्योगिक दुर्घटनाओं में गिना जाता रहा.

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