क्या आप भी पोर्न वीडियो देखते हैं?

डॉ. प्रकाश शर्मा
क्या आप भी पोर्न वीडियो देखते हैं? अगर हां, तो यह लेख आपके लिये ही है. आप भले खुलेपन के पक्ष में जितने भी तर्क दे लें लेकिन यह सच है कि पोर्न देखना सेहत के हिसाब से यह एक खतरनाक स्थिति है.

वैज्ञानिकों के एक शोध में यह बात सामने आई है कि अगर आप पोर्न देखते हैं तो उस समय आपके मस्तिष्क में डोपामाइन बनता है, जो पोर्न वीडियो या इस तरह की दूसरी सामग्री को देखते हुये आपको आनंद देता है. लेकिन अगली बार जब आप इसी पोर्न वीडियो को देखने के लिये आनंद की तलाश करते हैं तो आपके मस्तिष्क को आपको और अधिक डोपामाइन की जरुरत होती है. यह एक खतरनाक स्थिति है.

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मतलब साफ है कि ऐसे में आपको और अधिक पोर्न वीडियो देखने की जरुरत होती है. इस तरह हर बार आप पिछली बार की तुलना में इस पोर्न वीडियो के लिये अधिक समय देते हैं और उससे भी कहीं अधिक नये-नये किस्म के पोर्न देखने के लिये प्रेरित होते हैं.

सेक्स करने या देखने के दौरान हमारे दिमाग में ऑक्सिटोसिन और वासोप्रेसिन जैसे कई रासायन बनते हैं, जिन्हें हमारी स्मृतियों के लिये जिम्मेवार माना जाता है. यानी किसी चीज को याद रखने के लिये ऑक्सिटोसिन और वासोप्रेसिन जैसे रासायन जरुरी हैं. लेकिन लगातार पोर्न देखने के कारण हमारे मन-मस्तिष्क में पोर्न भर छाया रहता है और दूसरी चीज़ें हम भूलने लग जाते हैं.

सेरोटोनिन जैसे एजेंट्स हमारे शरीर में तब बनते हैं, जब हम सेक्स करते हैं. यह हमारे मन-मस्तिष्क को शांत करता है. लेकिन जब हम पोर्न वीडियो देखते हैं तो हमारे भीतर पोर्न देखने की उत्सुकता और कहीं गहराती चली जाती है. मन में एक भाव आने लगता है कि पोर्न वीडियो पर्याप्त हैं. ऐसे में वैवाहिक जीवन खराब हो सकता है.

कई बार ऐसा भी होता है कि पोर्न देखने वाला विवाह के बारे में ही सोचना बंद कर दे. कम से कम भारतीय समाज में इस तरह की स्थिति विवाह नामक संस्था को एक खत्म कर सकते हैं.

यही कारण है कि मनोवैज्ञानिक लगातार पोर्न देखने की स्थिति से बचने की सलाह देते हैं.ऐसे समय में जबकि इंटरनेट बेहद सुलभ हो चुका है, खास तौर पर किशोर वर्ग के लड़के लड़कियों में पोर्न एक बड़ी बीमारी के रुप में उभर सकता है. ऐसे में जरुरी है कि इस वर्ग के लोगों की पारिवारिक काउंसिलिंग की जाये. इस वर्ग को खेल, संगीत और चित्रकला जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाये. यह उन्हें पोर्न की दुनिया से उबरने में मदद करेगा.

इसके साथ-साथ पोर्न देखने के आदि किशोर और युवाओं के भीतर सेक्स के मुद्दे पर उठने वाले सवालों के ठीक-ठीक जवाब भी दिये जायें. इसके लिये स्कूली स्तर पर सेक्स को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाये जाने पर विचार किया जा सकता है.

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