छत्तीसगढ़ में गिरता जा रहा जल स्तर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की हालत खराब है. पानी लगातार नीचे जा रहा है और इसके संरक्षण के लिये किये जा रहे कथित उपाय से कहीं कोई फर्क नहीं पड़ा है.

भूजल स्तर की जानकारी के लिये सरकार कुंओं की स्थिति को देखती है. लेकिन इसी महीने लोकसभा में पेश एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुंओं की हालत खस्ता है. भूजल स्तर में कमी को लेकर किये गये दशकीय जल स्तर के उतार चढ़ाव के लिये सरकार ने जो नमूने लिये थे, जिसमें यह राज खुला कि छत्तीसगढ़ में जल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है.


गौरतलब है कि भूजल स्तर की जांच के लिये केंद्रीय भूमि जल बोर्ड देश में प्रेक्षण कुओं के नेटवर्क के जरिये क्षेत्रिय स्तर पर साल में चार बार भूमि जल स्तर की आवधिक निगरानी करता है. केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की इसी महीने पेश रिपोर्ट के अनुसार 2014-2016 के औसत से तुलना करने पर पिछले साल पता चला कि देश के 63 प्रतिशत से अधिक कुओं मे भूमि जल स्तर गिरा है.

लोकसभा में पेश इस रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ के 566 कुओं की स्थिति का आंकलन सरकार ने लगभग दस सालों तक किया. इस आंकलन से पता चलता है कि 219 कुओं के पानी में तो बढ़ोत्तरी हुई लेकिन 346 कुओं के पानी में गिरावट आई है. यह संख्या 61 प्रतिशत के आसपास है.

पिछले चार सालों यानी 2012 से 2016 तक के आंकड़े तो और भयावह हैं. इस आंकड़े के अनुसार 65 प्रतिशत कुंओं के पानी में गिरावट आई है.

सरकार ने इसी तरह 146 विकासखंडों में पानी की स्थिति का आंकलन किया तो पता चला कि एक विकासखंड में तो जल अतिदोहित के वर्ग में जा पहुंचा है, जबकि 2 विकासखंड की हालत गंभीर है. इसी तरह 18 विकासखंड भी अर्धगंभीर की स्थिति में पहुंच चुके हैं.

भूजल के उपयोग और प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिये केंद्र सरकार ने एक अंतर मंत्रालयी समिति का गठन भी किया है. इस समिति की अब तक तीन बैठकें भी हो चुती हैं. लेकिन समिति का कहना है कि भूजल का विनिमयन और संरक्षण मुख्य रुप से राज्यों की जिम्मेदारी है.

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