पाक को MFN दर्जा

जेके कर:
पाकिस्तान को दिये MFN दर्जे की समीक्षा होगी. खबरों के अनुसार भारत द्वारा पाकिस्तान को दिये MFN दर्जे की गुरुवार को समीक्षा होगी. मीडिया में कयास लगाये जा रहें हैं कि इसे वापस भी लिया जा सकता है. इसको लेकर विशेषज्ञों के दो मत है. कुछ जानकारों का मानना है कि यह महज प्रतीतात्मक होगा जबकि दूसरे कई जानकारों का मानना है कि इससे पाकिस्तान के उद्योगों को झटका लगेगा. इसकी पड़ताल करने के लिये पाकिस्तान के साथ भारत के विदेश व्यापार पर नज़र डालनी पड़ेगी. आकड़ों के आधार पर हम इसे समझने की कोशिश करेंगे.

गौरतलब है कि साल 1995 में विश्व व्यापार संगठन के अस्तित्व में आने के बाद भारत ने साल 1996 में ही पाकिस्तान को MFN या सबसे पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा दे दिया था. दरअसल, विश्व व्यापार समझौते के अनुसार इसके सभी देशों को दूसरे देशों को व्यापार की समान अनुमति देनी पड़ती है. फिर भी, सबसे पसंदीदा राष्ट्र के दर्जे की अनुमति दी गई है जिसके तहत व्यापार के लिये विशेष रियायतें देने का प्रावधान है.

उल्लेखनीय है कि भारत ने तो पाकिस्तान को व्यापार के लिये सबसे पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा दिया है परन्तु उसके बदले में पाकिस्तान ने भारत को यह दर्जा नहीं दिया गया है. जबकि पाकिस्तान ने बाद में भारत को NDMA याने नॉन डिसक्रेमटरी मार्केट एक्सेस का दर्जा दिया है. जिसके तहत बाजार तक गैर भेदभावपूर्ण तरीके से पहुंचने की इजाजत दी जाती है.

अब, मुद्दे की बात. केन्द्र सरकार के वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय द्वारा दिये गये आकड़ों के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच जो व्यापार होता है उसमें भारत का पक्ष भारी है. अर्थात् भारत, पाकिस्तान के ज्यादा माल भेजता है तथा कम मंगाता है. उसी तरह से पाकिस्तान, भारत से ज्यादा माल मंगाता है तथा कम भेजता है. पाकिस्तान के साथ विदेश व्यापार भारत के लिये कम होते हुये भी मुनाफे का सौदा तथा पाकिस्तान के लिये घाटे का सौदा है.

भारत ने साल 2015-16 में पाकिस्तान को 14,28,630.62 लाख रुपये का निर्यात किया जबकि आयात 2,88,450.27 लाख रुपये का किया. इस तरह से भारत ने पाकिस्तान के साथ 11,40,180.35 लाख रुपये का ज्यादा व्यापार किया. इसी तरह से पिछले पांच सालों के ट्रेड बैलेंस पर निगाह डालने से स्पष्ट हो जाता है कि भारत ने हमेशा से पाकिस्तान के साथ मुनाफे का सौदा किया है.

भारत से पाकिस्तान को सबसे ज्यादा मात्रा में निर्यात सूती, फिलामेंटस, फाइबर, खाने का तेल, ऑरगेनिक केमिकल, रंग तथा डाईस, प्लास्टिक तथा रबर का किया जाता है. भारत से पाकिस्तान को जो अन्य वस्तुयें निर्यात की जाती हैं वे हैं- डेयरी उत्पादन, चाय-काफी, अनाज, शक्कर तथा केमिकल्स.

जबकि पाकिस्तान से भारत खनिज ईंधन, खनिज तेल व उनके आसवन से बने उत्पाद, फल, तरबूज, मेवा, नमक, सल्फर,प्लास्टर की सामग्री, चूना तथा सूती का आयात करता है.

जाहिर सी बात है कि यदि भारत, पाकिस्तान को दिये MFN दर्जे की समीक्षा करता है तो पाकिस्तान भी NDMA की समीक्षा कर सकता है. कुलमिलाकर MFN की समीक्षा तथा वापस लेना प्रतीतात्मक ही रहेगा न कि प्रभावकारी. उलट इससे भारत के नुकसान होने की संभावना है. इसके बावजूद, आतंकवाद को पनाह देने वाले देश के खिलाफ उठाये जाने वाले किसी भी कदम का हम समर्थन करते हैं.

बहरहाल, मामला कुछ-कुछ पाकिस्तान को सिंधु नदी द्वारा दिये जाने वाले पानी को रोकने जैसा है. जिसमें पाकिस्तान को दिये जा रहे पानी को रोकने से पहले यह देखना है कि इससे भारत के कितने क्षेत्र डूबान में आ सकते हैं.

भारत-पाक व्यापार के आकड़ें-

साल 2011-12
निर्यात- 7,44,826.91 लाख रुपये (0.51%)
आयात- 1,90,030.19 लाख रुपये (0.08%)

साल 2012-13
निर्यात- 11,23,262.97 लाख रुपये (0.69%)
आयात- 2,94,370.34 लाख रुपये (0.11%)

साल 2013-14
निर्यात- 13,83,214.04 लाख रुपये (0.73%)
आयात- 2,60,656.88 लाख रुपये (0.10%)

साल 2014-15
निर्यात- 11,35,211.32 लाख रुपये (0.60%)
आयात- 3,04,066.81 लाख रुपये (0.11%)

साल 2015-16
निर्यात- 14,28,630.62 लाख रुपये (0.83%)
आयात- 2,88,450.27 लाख रुपये (0.12%)

भारत-पाकिस्तान का ट्रेड बैलेंस-
साल 2011-12- 5,54,796.72 लाख रुपये
साल 2012-13- 8,28,892.63 लाख रुपये
साल 2013-14- 1122577.17 लाख रुपये
साल 2014-15- 8,31,144.51 लाख रुपये
साल 2015-16- 11,40,180.35 लाख रुपये

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