छत्तीसगढ़ में नहीं खुलेगा बूचड़खाना

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि जब तक छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार है, तब तक राज्य में कहीं भी बूचड़खाना नहीं खुलेगा. गौवंश की रक्षा के लिए राज्य सरकार वचनबद्ध है. उन्होंने यह भी कहा कि राजनांदगांव में चिकन प्रोसेसिंग प्लांट नहीं खोला जाएगा. रमन सिंह ने मंगलवार को बताया कि हाल ही में राजनांदगांव के लोकसभा सांसद अभिषेक सिंह और वहां के कुछ जनप्रतिनिधियों ने मुझसे मुलाकात कर यह बताया था कि राजनांदगांव जिले में कुछ लोगों द्वारा यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि वहां बूचड़खाना खोलने की योजना बनाई जा रही है, जबकि इस बात में जरा भी सच्चाई नहीं है.

डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार ने गौवंशीय पशुओं की हत्या पर पहले ही कानूनी प्रतिबंध लगा रखा है. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने संबंधित सचिव को यह निर्देश दिए हैं कि राजनांदगांव में चिकन प्रोसेसिंग प्लांट नहीं खोला जाए.


मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने अपने यहां गौवंश के साथ-साथ भैंस वंश के पशुओं के वध को भी प्रतिबंधित कर दिया है. इसके लिए व्यापक जनहित और राज्य के हित में विधानसभा में विधेयक पारित कर छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 और छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2011 लागू किया गया है.

छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 का प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में 11 सितम्बर 2006 को और छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2011 का प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में 13 जनवरी 2012 को किया जा चुका है.

इस अधिनियम का विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में है, जिसमें सभी आयु वर्ग की गायें, बछड़ा-बछिया, पाड़ा-पड़िया, सांड-बैल, भैंसा और भैंसों का वध प्रतिबंधित है. जो कोई भी इस अधिनियम की धाराओं-4, 5 और 6 के प्रावधानों का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन का प्रयास करेगा, उसे सात वर्ष तक जेल की सजा या 50 हजार रूपए तक जुर्माने से या दोनों सजाओं से दण्डित किया जा सकेगा.

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