देश की अर्थव्यवस्था खतरे में-सुब्रमण्यम

नई दिल्ली | डेस्क: नरेंद्र मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा है कि भारत बहुत ही गंभीर संकट में आ गया है. तीन सालों तक नरेंद्र मोदी सरकार के आर्थिक सलाहकार रहे सुब्रमण्यम ने कहा है कि यह कोई मामुली आर्थिक संकट नहीं है.

एनडीटीवी को दिये एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि ग़ैर-पेट्रोलियम उत्पाद की आयात और निर्यात दर में क्रमशः 6 फ़ीसदी और एक फ़ीसदी की गिरावट है. कैपिटल गुड्स इंडस्ट्री की वृद्धि दर में 10 फ़ीसदी की गिरावट है. कंज्यूमर गुड्स प्रोडक्शन की वृद्धि दर दो साल पहले पाँच फ़ीसदी पर थी दो अब एक फ़ीसदी पर है. इन आँकड़ो से समझा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था किस हालत में है.

अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि निर्यात, कंज्यूमर गुड्स और कर राजस्व का आँकड़ा भी काफ़ी निराशाजनक है. अगर 2000 से 2002 के भारत के आर्थिक संकट को देखें तो पता चलता है कि तब जीडीपी वृद्धि दर 4.5 फ़ीसदी थी लेकिन बाक़ी के आँकड़े सकारात्मक थे जबकि अभी ये सारे आँकड़े या तो नकारात्मक हैं या नकारात्मक के क़रीब है.

अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि यह कोई सामान्य आर्थिक संकट नहीं है बल्कि यह भारत का गंभीर आर्थिक संकट है.

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के जो मुख्य आँकड़े हैं वो या तो नकारात्मक हैं या उसके क़रीब हैं. ग्रोथ, निवेश, निर्यात और आयात में वृद्धि से नौकरियां पैदा होती हैं लेकिन सब कुछ नीचे जा रहा है. आपको यह भी देखना होगा कि सरकार सोशल प्रोग्राम पर कितना राजस्व खर्च कर रही है. नौकरी और लोगों की आय में लगातार गिरावट आ रही है.

अरविंद दुनिया के उन जाने-माने अर्थशास्त्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत करीब से देखा-समझा है. इन्होंने ही भारत सरकार द्वारा जीडीपी के आंकड़ों में फेरबदल कर विकास दर को बढ़ा कर दिखाये जाने का गंभीर आरोप लगाया था. जिसके बाद कई देशों ने भारत के इस कदम की आलोचना की था.

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