बागड़िया ब्रदर्सः रायपुर से रुस तक कारोबार

रायपुर | संवाददाता: रोटोमैक कंपनी के विक्रम कोठारी के साथ कथित रुप से हवाला का कारोबार के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय के निशाने पर आये रायपुर के बागड़िया ब्रदर्स का लंबा चौड़ा कारोबार हैं. सीबीआई की एफआईआर की मानें तो कोठारी ने 15 हजार 700 मीट्रिक टन गेंहूं आयात करने के नाम पर 33 करोड़ 72 लाख रुपये बागड़िया को दिया और बागड़िया ने सिंगापुर स्थित अफनी कंपनी के सहारे फिर से सारी रक़म कोठारी के खाते में पहुंचा दी. यह रकम बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा कोठारी को गेहूं की खरीदी के लिये बतौर ऋण दिया था. लेकिन यह सारी रकम बिना गेहूं खरीदे वापस कोठारी को मिल गई. इस पूरे काम में बागड़िया ब्रदर्स ने अहम भूमिका निभाई. लेकिन इन तमाम सबूतों से अलग बागड़िया ब्रदर्स की दलील है कि उन्होंने कोई भी गैरकानूनी काम नहीं किया है.

बागड़िया ब्रदर्स का नाम कर्नाटक और गोवा के खनिज घोटाले में भी सामने आ चुका है. हालांकि गोवा की एसआईटी ने इस मामले में बागड़िया ब्रदर्स को क्लिन चिट दे दी थी.


देश के पांच शीर्ष आयरन ओर एक्सपोर्टर बागड़िया ब्रदर्स पर आरोप लगा था कि उन्होंने बिना रायल्टी के समुद्री मार्ग से चीन को भारी मात्रा में लौह अयस्क की सप्लाई की थी. उक्त मामले में घोटाले की जांच कर रहे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम और ईडी दोनों ने बागड़िया ब्रदर्स के खिलाफ कारवाई की थी. उन पर आरोप था कि उन्होंने खनिज एवं भूगर्भ निदेशालय के अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के साथ बिना रायल्टी चुकाए 40,765 मीट्रिक टन लौह अयस्क एमवी पैसिफिक नामक जहाज से चीन को निर्यात कर दिया था.

दिलचस्प ये है कि इस मामले में खनिज विभाग ने खुद ही रिपोर्ट दर्ज करवाई थी और बाद में यह बात सामने आई कि बागड़िया ब्रदर्स ने रायल्टी चुका कर निर्यात किया था. इन तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने क्लोज़र रिपोर्ट दायर की थी. इसके अलावा कर्नाटक में येदुरप्पा सरकार ने प्रतिबंध के बाद भी जिन कंपनियों को गैरकानूनी तरीके से आयरन ओर दिया था, उन 83 कंपनियों में भी बागड़िया ब्रदर्स का नाम आया था.

रायपुर और छत्तीसगढ़ में कंपनी की अपनी प्रतिष्ठा है. भारत के अलावा रुस से लेकर अफ्रीका तक दुनिया के कई देशों में अलग-अलग कंपनियां हैं, कार्यालय हैं, सब्सिडरी कंपनियां हैं. भारत के अलग-अलग शहरों में बागड़िया ब्रदर्स के कम से कम 11 दफ्तर हैं. जो कांडला से कोलकाता तक फैले हुये हैं.

प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि बागड़िया ब्रदर्स पिछले कई सालों से अनाज और आयरन ओर के उत्पादों से जुड़े हुये हैं. कंपनी की अपनी प्रतिष्ठा रही है और कंपनी का दावा है कि वह दूसरे देशों में निर्यात का काम भी करती रही है.

रायपुर के जवाहर नगर इलाके में 28 अगस्त 2002 को पंजीकृत बागड़िया ब्रदर्स में अनुराग अग्रवाल, ओमी बागड़िया, आनंद कुमार अग्रवाल, दीपक रहेजा, पंकज अग्रवाल और सतीश शर्मा वर्तमान डायरेक्टर हैं. इस कंपनी में पहले ओम प्रकाश अग्रवाल और नीरज श्रीवास्तव भी हुआ करते थे लेकिन दोनों ने बाद में इस्तीफा दे दिया. नीरज श्रीवास्तव कंपनी में सचिव के पद पर थे.

अनुराग अग्रवाल बागड़िया ब्रदर्स के अलावा अन्य 10 पंजीकृत कंपनियों के भी डायरेक्टर हैं. इसी तरह ओमी बागड़िया के पास 10 कंपनियां हैं, जबकि आनंद अग्रवाल पांच कंपनियों के निर्देशक हैं. दीपक रहेजा अलग-अलग किस्मा का कारोबार करने वाली 6 कंपनियों में बतौर निदेशक हैं. प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि पंकज अग्रवाल के पास तीन कंपनियों के निर्देशक होने का प्रमाण उन्हें मिला है. सतीश शर्मा बागड़िया ब्रदर्स के अलावा और कहीं किसी कंपनी से नहीं जुड़े हुये हैं.

बागड़िया ब्रदर्स से इस्तीफा देने वाले ओम प्रकाश अग्रवाल भारत फूड प्रोडक्ट्स एंड बिस्किट्स कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में भी डायरेक्टर थे, लेकिन उन्होंने यहां से भी इस्तीफा दे दिया. अब इस कंपनी के निदेशकों में सरोज अग्रवाल और सविता अग्रवाल शामिल हैं. इनमें से सभी लोग आपस में जुड़े हुये हैं. बागड़िया ब्रदर्स के पंकज अग्रवाल और भारत फूड प्रोडक्ट्स एंड बिस्किट्स कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की सविता अग्रवाल की एक कंपनी स्वास्तिक पर्सनल युटिलिटिस प्राइवेट लिमिटेड है.

अफ्रीका के पश्चिम तट पर बसे सेनेगल में खुद के स्वामित्व वाली कंपनी है तो इसी तरह पश्चिमी अफ्रीका के आइवरी कोस्ट में भी कारोबार फैला हुआ है. एक कार्यालय रुस में है तो चीन में भी खुद का कार्यालय है. बांग्लादेश में एक कार्यालय है तो सिंगापुर में बागड़िया ब्रदर्स के नाम की एक स्वतंत्र कंपनी है, जो सिंगापुर में ही पंजीकृत भी है. सिंगापुर के सिसिल स्ट्रीट में कंपनी का शानदार दफ्तर है.

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