‘BMC चुनाव में हाथी ने अंडा दिया’

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: बीमसी चुनाव में शिवसेना तथा भाजपा ने झंडे गाड़ दिये हैं. बीएमसी चुनाव शिवसेना तथा भाजपा ने अलग-अलग लड़ा था. दोनों के बीच सीटों के बंटवारे पर बात नहीं पाई थी इसलिये बृहन्मुंबई नगर पालिका दोनों ने पृथक-पृथक लड़ा था. भले ही बीएमसी चुनाव के पहले कुछ लोग कयास लगा रहे थे कि महाराष्ट्र में बात बिगड़ गई है लेकिन नतीजे उसके ठीक विपरीत आये हैं.

बीएमसी चुनाव में सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को हुआ है. भाजपा को पिछले बीएमसी चुनाव में जो 2012 में हुआ था में 31 सीटें मिली थी उसे इस बार 81 सीटें मिली हैं. वहीं, शिवसेना महज 75 से 84 की संख्या पर पहुंची है. शिवसेना को केवल 9 सीटों का फायदा मिला है.


इसी तरह से पिछले चुनाव में 52 सीटें पाने वाली कांग्रेस घटकर 31 पर आ गई है. एनसीपी को 13 की बजाये 9 सीट ही मिले हैं. सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र नव निर्माण सेना को हुआ है. मनसे को पिछली बार जहां 28 सीटें मिली थी इस बार मात्र 7 सीटें ही मिली हैं. कांग्रेस की भी 21 सीटें कम हुई है. 13 सीटें अन्य को मिली हैं.

बीएमसी चुनाव को लेकर सोशल मीडिया में भी खासी चर्चा हो रही है. कुछ इसे भविष्य की पदचाप बता रहें हैं तो कुछ यूपी-पंजाब के चुनाव नतीजों की प्रतीक्षा करने की सलाह दे रहें हैं.

आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने ट्वीट किया है, ”बीएमसी चुनाव में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन जारी है. (नीचे की तरफ़ से).”

एक निखिल जैन लिखते हैं, ”संजय निरुपम को सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मिल गया है. ज़ोर का झटका ज़ोर से ही लगा.”

एक उमाकांत मिश्रा ने फेसबुक पर लिखा, ”जिसे पता नहीं है, उसे बता दूं कि हाथी ने भी बीएमसी चुनाव लड़ा था और फिर से अंडा दिया.”

बहरहाल, बीएमसी के नतीजे से मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस का कद बढ़ा है. कम से कम शिवसेना को इतना तो समझा ही दिया गया है कि भाजपा की बैशाखी के बिना उसका चल पाना मुश्किल है. कुल मिलाकर भाजपा-शिवसेना को पहले की तुलना में ज्यादा सीटें मिले हैं.

पिछले बीएमसी चुनाव में दोनों के गठबंधन को 106 सीटें मिली थी लेकिन अलग-अलग चुनाव लड़ने के बाद भी उन्हें इस बार 165 सीटें मिली है. मुंबई की जनता ने गठबंधन न होने के बावजूद भी भाजपा-शिवसेना को ही वरीयता दी है.

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