शिक्षा-चिकित्सा खर्च में गड़बड़ी- CAG

रायपुर | संवाददाता: कैग ने छत्तीसगढ़ के शिक्षा-चिकित्सा की पोल खोल दी है. गुरुवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ के बारें में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ऑडिट रिपोर्ट पेश की. उसके बाद छत्तीसगढ़ के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विजय मोहंती ने संवाददाताओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया.

कैग की रिपोर्ट से छत्तीसगढ़ में शिक्षा की पोल खुल गई है. कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में एपीजे अब्दुल कलाम शिक्षा गुणवत्ता अभियान चलाने के बावजूद मात्र 25 फीसदी स्कूलों को ही ‘ऐ’ ग्रेड मिल पाया है. गौरतलब है कि यह केन्द्र सरकार की शिक्षा के गुणवत्ता को ऊंचा उठाने के लिये शुरु की गई महत्वकांक्षी योजना है. जिसके तहत ‘बी’ एवं ‘सी’ ग्रेड के स्कूलों को ‘ऐ’ ग्रेड में उन्नत करने का लक्ष्य रखा गया है. कैग ने पाया कि इस अभियान को शुरु करने के बाद भी छत्तीसगढ़ के मात्र 25 फीसदी स्कूल ही ‘ऐ’ ग्रेड में आते हैं.


कैग ने ऑडिट के दौरान पाया कि जितने छात्र हैं उनके मुताबिक न तो उतनी संख्या में स्कूल हैं और न ही शिक्षक हैं. करीब 11,963 शिक्षक अप्रशिक्षित हैं. इसके अलावा किताब खरीदी में 8 करोड़ रुपयों की गड़बड़ी पाई गई है.

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में 344 करोड़ रुपयों का अनियमित भुगतान हुआ है. राज्य में चिकित्सा शिक्षा के लिये 1160 करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे जिसमें से 416 करोड़ रुपयों का उपयोग ही नहीं हुआ है. इस तरह से मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के लिये जो धन आवंटित था उसका करीब 36 फीसदी खर्च ही नहीं किया जा सका है. जाहिर है कि चिकित्सा शिक्षा अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ा ही रह जायेगा. शासन ने 80 हजार करोड़ रुपयों का बजट आवंटित किया था जिसका 20 हजार करोड़ रुपये याने एक चौथाई खर्च ही नहीं हुआ है.

कैग की ऑडिट रिपोर्ट से यह भी खुलासा हुआ है कि ब्रेवरेज निगम लिमिटेड ने विदेशी शराबों का उच्च दरों पर कंपनियों से खरीदा है जिससे उन्हें 111 करोड़ रुपयों का पायदा हुआ है. जबकि यह किया जाना चाहिये था कि अन्य राज्यों से इन शराब की कीमत मंगाकर, उसका अध्ययन करने के बाद दाम तक करके भुगतान करना था.

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