वे कहीं गए हैं, बस आते ही होंगे

दिवाकर मुक्तिबोध “शिष्य. स्पष्ट कह दूं कि मैं ब्रम्हराक्षस हूँ किंतु फिर भी तुम्हारा गुरु हूँ. मुझे तुम्हारा स्नेह चाहिए.

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महामारी और महामारी के बाद प्रवेश परीक्षा

संदीप पांडेय कोविड महामारी के समय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों व अन्य अभियांत्रिकी संस्थानों में प्रवेश हेतु

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