खुदकुशी करके मरते CRPF के जवान

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के सुकमा में crpf जवान ने खुदकुशी कर ली. सोमवार शाम को नक्सल प्रभावित सुकमा में सीआरपीएफ के जवान रोशन एक्का ने सर्विस रायफल से खुद को गोली मार ली. खुदकुशी करने वाला सीआरपीएफ जवान 219वीं बटालियन में आरक्षक था.

सोमवार शाम जब रोशन एक्का बैरक में था तो अन्य जवानों ने गोली आवाज सुनी. जब जवान वहां पहुंचे तो रोशन एक्का खून से लथपथ पड़ा मिला. जवानों तथा अधिकारियों ने उसे अस्पताल पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.


मिली जानकारी के अनुसार रोशन दो दिन पहले ही छुट्टी से वापस लौटा था. उसके शव को उसके गृह जिले रांची भेज दिया गया है.

संसद में पेश आकड़ें
गौरतलब है कि पिछले पांच साल में नक्सली इलाकों में सीआरपीएफ के 870 जवान तनाव के कारण मारे गये हैं. इसकी तुलना में नक्सलियों द्वारा मारे गये सीआरपीएफ के जवानों की संख्या 323 है. कांग्रेस के सांसद मोतीलाल वोरा द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में गृह राज्यमंत्री हरिभाई चौधरी ने बताया था कि 2009 के जनवरी माह से 2013 के दिसंबर माह तक नक्सली इलाकों में तैनात सीआरपीएफ के 642 जवान हृदयाघात से मारे गये तथा 228 ने अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली. इसी अवधि में मलेरिया से मरने वाले जवानों की संख्या 108 है.

सबसे ज्यादा आत्महत्या CRPF में
सरकारी आकड़ों के अनुसार Central Armed Police Forces personnel (CAPF) में सबसे ज्यादा आत्महत्या CRPF के जवान करते हैं. पिछले चार सालों में पूरे देश में CRPF में 137 आत्महत्या, ITBP में 12 आत्महत्या, SSB में 26 आत्महत्या, CISF में 50 आत्महत्या और AR में 32 आत्महत्या के मामले सामने आये हैं.

छत्तीसगढ़ में साल 2016 में आत्महत्या
सुनील कुमार ने 29 अक्टूबर को दंतेवाड़ा में आत्महत्या कर ली थी. दंतेवाड़ा में जून माह में कोंदापारा में सतीश ने आत्महत्या कर ली थी. जून माह में ही बीजापुर में पदस्थ पवित्र यादव ने एके-47 से आत्महत्या की थी. इसी तरह से जुलाई माह में सुकमा में तेजवीर सिंह ने अपनी पिस्टल से आत्महत्या कर ली थी.

इसी के साथ सवाल किया जाना चाहिये कि आखिर क्यों नक्सल इलाकों में जाते ही जवान तनावग्रस्त हो जाते हैं. यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि नक्सली इलाकों में सीआरपीएफ तथा पुलिस की पोस्टिंग को ‘पनिशमेंट’ के रूप में देखा जाता है. कई नक्सल प्रभावित इलाकों में खाने की कौन कहे पीने के पानी तक की ठीक से व्यवस्था नहीं होती है.

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