छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन का धरना

रायपुर | संवाददाता: राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ बचाओं आंदोलन ने एक दिवसीय धरना दिया. धरने के दौरान वक्ताओं ने बस्तर के आईजीपी एसआरपी कल्लूरी को प्रधानमंत्री के दौरे के समय महिमामंडित किये जाने की आलोचना की. छत्तीसगढ़ बचाओँ मंच में शामिल संगठनों ने बस्तर के आईजीपी कल्लूरी की गिरफ्तारी की मांग की है. धऱने के बाद राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन राज्यपाल के माध्यम से भेजा गया.

मंच से जुड़े जन संगठनों और राजनितिक दलों ने एक स्वर में कहा कि आज बस्तर के अन्दर माओवादी उन्मूलन के नाम पर निर्दोष आदिवासियों का दमन और मानवाधिकारो का क्रूरतापूर्वक हनन हो रहा हैं. आदिवासियों को फर्जी मुठभेड़ों में मारा जा रहा हैं, महिलाओं के साथ सुरक्षाबलों के द्वारा बलात्कार की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा हैं. यह सब केंद्र और राज्य सरकार के इशारे पर बस्तर की अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की कार्पोरेट लूट का रास्ता तैयार करने के लिए किया जा रहा हैं.


पिछले दिनों माननीय सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई सीबीआई की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया की बस्तर के तीन गाँव मोरपल्ली, तिम्मापुर और ताड़मेटला के 252 घरों को एसआरपी कल्लूरी के आदेश पर सुरक्षा बालों के द्वारा जला दिये गये, महिलाओं के साथ बलात्कार किये गये. ऐसे पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार करने के बजाये भाजपा सरकार उसे संरक्षण प्रदान कर रही हैं, यही कारण है कि राज्योत्सव के दौरान वह अधिकारी देश के प्रधानमंत्री के स्वागत की पहली पंक्ति में हैं और उसके साथ फोटो खिचवाई जा रही हैं.

वक्ताओँ ने आरोप लगाया कि यह घटना साफ तौर पर दर्शाती हैं की बस्तर के आदिवासियों का दमन भाजपा सरकार के इशारें पर किया जा रहा हैं.

बस्तर पत्रकार संयुक्त संघर्ष समिति के कमल शुक्ला ने कहा की बस्तर में सुरक्षा बल गैरकानूनी खनन करने वाली कंपनियों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं, और निर्दोष आदिवासियों को मार रहे है, उन्होंने कहा की बस्तर में खनिजों की लूट का खेल चल रहा हैं.

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