नोटबंदी की मार, धान के दाम गिरे

जगदलपुर | संवाददाता: नोटबंदी की मार से बस्तर के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. बस्तर के किसानों को मजबूरी में कोचिये को 6-7 रुपये किलो की दर से धान बेचना पड़ रहा है. जिसे कोचिये 11-12 रुपये किलो की दर से बड़े व्यापारियों को बेच रहें हैं. जबकि धान पर सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मूल्य 14.70 रुपये हैं.

इससे पहले भी ऐसी खबरें आई थी कि बस्तर के किसान अपने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिये 5 रुपये किलो की दर से धान बेचने को मजबूर हैं.


गौरतलब है कि इस साल धान कटाई से समय ही नोटबंदी का ऐलान किया गया है. जिस कारण बाजार में नगदी की कमी से धान की खरीदी भी प्रभावित हो रही है. बड़े व्यापारी नगदी की कमी का उदाहरण देकर धान खरीदने से मना कर रहें हैं जिससे किसानों को मजबूरी में लागत से काफी कम कीमत पर धान बेचना पड़ रहा है.

बस्तर के आदिवासी किसान वहां के साप्ताहिक हाट में अपने धान बेचने के लिये आते हैं. धान बेचकर उससे मिले पैसे से वे अपनी जरूरत का सामान खरीदते हैं. अब अपनी रोमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिये उन्हें मजबूरी में कम कीमत में धान बेचना पड़ रहा है.

बस्तर के किसानों को धान का दाम कम मिलने से माना जा रहा है कि उनकी क्रयशक्ति भी कम होती जा रही है. जिसका सीधा असर आने वाले समय में वहां के बाजारों में दिखने लगेगा.

बस्तर के बाजारों में और मंदी आयेगी जिससे व्यापारी भी प्रभावित होंगे. इस तरह से नोटबंदी का असर लंबे समय तक बना रहेगा.

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