बस्तर की इमली विदेश पहुंची

जगदलपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर की इमली विदेशों में जा रही है. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर में इमली की पैदावार बड़ी मात्रा में होती है. यहां के वनोपज में प्रमुख उपज इमली को माना जाता है. गर्मी के मौसम में यहां के जंगलों व गली-मोहल्लों में लगे इमली के पेड़ों पर इसकी खूब पैदावार होती है. बस्तर की इमली अब खाड़ी देशों तक पहुंचने लगी है.

गांव-गांव में इमली की सफाई और इसके बीज निकालने के लिये व्यपारियों ने फड़ खोल रखे हैं. पहले ग्रामीणों से उनकी इमली हाट-बाजारों में खरीदी जाती है और इसे जमा कर फिर इसे साफ करवाने का काम भी इन्हीं से ही करवाया जाता है. ऐसे में ग्रामीणों को दोहरा लाभ हो रहा है.


बस्तरिया इमली की खासियत इसकी क्वालिटी और रंग है, जो विदेशों में अपनी पहचान बनाये हुये है. यहां की इमली की मांग आंध्रप्रदेश, केरल, तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो है ही, वहीं सालाना 150-200 करोड़ के इमली का निर्यात श्रीलंका, मलेशिया, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में भी किया जाता है.

बस्तर के नारायणपुर से आने वाली इमली अपने बेहतर क्वालिटी के लिए विख्यात है तो लोंहड़ीगुड़ा की इमली अपने रंग को लेकर लोकप्रिय है. वहीं दरभा की इमली गूदेदार और मीठे स्वाद की वजह से अन्य राज्यों में भी पसंदीदा बनी हुई है.

बस्तर के जगदलपुर में एशिया कीसबसे बड़ी इमली मंडी है. जहां आजकल रोज 500-600 बोरा इमली आ रहा है. इसके प्रति क्विंटल का भाव 2500 रुपये से लेकर 3125 रुपये तक किसानों को मिल रहा है.

बुधवार से इमली सहित सभी कृषि उपज की ऑनलाइन बिक्री शुरु हो जायेगी.

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