काला धन सफेद ऐसे होता है

रायपुर | संवाददाता: नोटबंदी के बाद वित्तीय सलाहकारों की सलाह पर बड़े आराम से काले धन को सफेद किया जा रहा है. कहते हैं कि जहां चाह वहां राह, यह कहावत काले धन को सफेद करने की प्रक्रिया ने सही साबित किया है.

बताया जा रहा है कि एक तरफ आयकर विभाग व्यापारियों के यहां दबिश दे रहा है दूसरी तरफ उसकी आड़ में काले धन पर सफेद का ठप्पा भी लग जा रहा है.


जिन व्यापारियों के पास 8 नवंबर को जितना कैश दर्ज था वह नहीं होने पर वे उन व्यापारियों से उनका कैश पुराने नोटों में ले रहें हैं. वहीं जिनके पास 8 नवंबर को दर्ज हिसाब के अनुसार से ज्यादा कैश है वे उन्हें ब्याज पर दे दे रहें हैं जिनके पास वास्तव में कम रकम है. इससे दोनों तरह के व्यापारियों को पायदा हो रहा है.

दूसरी तरफ आयकर को दिखाने के लिये पूरा कैश पेश किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि यह सब वित्तीय सलाहकारों की सलाह पर ही हो रहा है. बाजार में ऐसे सलाहकारों की कमी नहीं है जो काले धन को सफेद करने का ज्ञान रखते हैं.

वहीं इस तरह से पुराने नोटों को 1 से 2 फीसदी की ब्याज पर भी चलाया जा रहा है.

इतना ही नहीं सूत्रों का दावा है कि छत्तीसगढ़ में जितने भी पुराने नोट बदलवाये गयें हैं उनमें भी इसी तरह के गणित का उपयोग किया गया है. जिनके हिसाब में 10 लाख रुपये दर्ज थे तथा उतना कैश नहीं था वे उन लोगों से ब्याज में पुराने नोट लेकर बैंक में जमा करा आये जिनके पास विवरणी से ज्यादा कैश था.

इस तरह से जिस काले धन को पकड़ने के लिये नोटबंदी की गई है वे बड़े आराम से अपना काम निकाल ले रहे हैं वहीं आम जनता जिनका ज्यादातर पैसा बैंकों में जमा होता है वे परेशान हो रहें हैं.

इस तरह से वह कहावत भी चरितार्थ हो रही है जिसमें कहा गया जाता है करता कोई और है और भरता कोई और है.

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