बुरगुम मुठभेड़: कोर्ट में पलटी सरकार

बिलासपुर | संवाददाता: बुरगुम मुठभेड़ पर सरकार हाईकोर्ट में पलट गई. सरकार ने कहा कि बस्तर के बुरगुम में जो दो आदिवासी युवक मारे गये थे, उनकी हत्या अज्ञात लोगोंं ने की थी. इस मामले में मारे गये नाबालिग युवकों के वकील सतीशचंद्र वर्मा ने कहा कि पुलिस इससे पहले लगातार यह दावा करती रही है कि उसने 24 सितंबर को बुरगुम में माओवादियों के साथ मुठभेड़ किया था और दोनों लोग उसी मुठभेड़ में मारे गये थे. पुलिस ने इस मुठभेड़ में शामिल सुरक्षाबल के जवानों को 1 लाख रुपये का इनाम भी दिया था.

आज हाईकोर्ट इस तथ्य के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने एक बयान जारी करते हुये कहा कि घटना 23 और 24 सितंबर की दरमियानी रात घटी थी जब शोक संदेश देने दोनों बच्चे अपने रिश्तेदार के घर बुरगुम गए हुए थे. रिश्तेदारों का बयान है कि पुलिस देर रात दोनों को घर से पकड़कर ले गई थी उसके बाद उन्होंने गोलियां चलने की आवाज सुनी थी और उसके बाद उन दोनों की लाश मिली थी.


सोनकू राम पिता पायकू की उम्र 16 साल और बिजलू राम कश्यप पिता नड़गीराम की उम्र 17 साल थी, जो बारसूर थाना क्षेत्र के भटपाल ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम गड़दा के निवासी थे. दोनों एक साल पहले तक हितामेटा बारसूर के पोटाकेबिन में रहकर कक्षा 8वीं में पढ़ाई कर रहे थे.

इस साल घरेलू काम में व्यस्तता की वजह से स्कूल में दाखिला नहीं लिया था.

घटना के अगले ही दिन बस्तर एसपी आरएन दास ने बकायदा एक पत्रकारवार्ता में दो नक्सलियों के मारे जाने का दावा किया था. पुलिस के अनुसार उन्हें नक्सली समूह के बारे में सूचना मिली थी, उसके बाद उन्होंने एक पुलिस दल रवाना किया था. उन्होंने मुठभेड़ और जवाबी गोलीबारी की भी बात कही थी.

आरएन दास के अनुसार बच्चों के पास से 12 बोर की बंदूक और रायफल, एक्सप्लोसिव और डेटोनेटर बरामद किया गया था.

इस मामले को सबसे पहले कांग्रेस विधायक देवती कर्मा ने ही 26 सितंबर को उठाया था और इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए इसकी जांच की मांग की थी. इसके बाद कांग्रेस का एक जांच दल भी घटना स्थल तक गया था और जांच रिपोर्ट में भी देवती कर्मा के आरोपों की पुष्टि हुई थी. लेकिन बाद में पुलिस ने बच्चों के परिजनों पर दबाव बनाना शुरु कर दिया था कि वे मामला वापस लें. उल्टे देवती कर्मा पर युवकों के परिजनों के अपहरण का मामला बना दिया था.

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