फसल बीमा का भुगतान 5 साल बाद भी नहीं

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में फसल बीमा का करोड़ों रुपये का भुगतान पांच साल बाद भी बाकी है. किसान राज्य सरकार के पास गुहार लगा लगा कर थक गये हैं लेकिन सरकार चुनावी साल में भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठी है. 2014 में मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत अकेले मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह जिले राजनांदगांव में किसानों का 5,89,63,188.83 रुपये बकाया है. लेकिन बीमा कंपनियां भुगतान करने का नाम नहीं ले रही हैं.इस संबंध में मुख्यमंत्री तक को कई बार अनुरोध किया जा चुका है. लेकिन आज तक किसानों को फूटी कौड़ी नहीं मिली है.

2014 में छत्तीसगढ़ के सभी 27 ज़िलों में निजी बीमा कंपनियों ने मनमाने तरीके से आंकलन करते हुये किसानों को करोड़ों रुपये की चपत लगाई. हालत ये हुई कि जिन किसानों ने खेती ही नहीं की, पटवारी रिकार्ड में जिन खेतों को सूखा के कारण फसल नहीं लगाने की बात दर्ज की गई, उन किसानों से भी बीमा कंपनी ने 20-20 हजार रुपये की प्रीमियम की रकम वसूल ली. इसके उलट राज्य के कई इलाकों में बीमा कंपनियों ने सूखा के नाम पर 5-5 रुपये का मुआवज़ा भी बांट दिया.


इस मौसम आधारित घोटाले में सबसे बड़ा हेर-फेर बारिश के आंकड़ों में किया गया. बीमा कंपनियों की खुलेआम लूट को इस बात से समझा जा सकता है कि इन बीमा कंपनियों ने जो मौसम केंद्र खुद स्थापित किये, उनके आंकड़ों को भी खारिज कर दिया और मनमाने तरीके से मुआवजे की रकम बांटने का काम किया. पूरे राज्य में बीमा कंपनियों ने लूट के इस खेल को अंजाम दिया.

इस खुली लूट का शिकार मुख्यमंत्री का गृह ज़िला राजनांदगांव भी हुआ. राजनांदगांव में करीब 1 लाख 22 हज़ार किसान हैं, जहां निजी बीमा कंपनी बजाज एलायंज ने 27 मौसम केंद्र स्थापित करने का दावा किया है. इन 27 मौसम केंद्रों में से 18 केंद्र ऐसे थे, जहां तयशुदा बारिश नहीं हुई थी. लेकिन बीमा कंपनी और सरकार के दस्तावेज़ों से यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि बीमा कंपनी ने सारखेड़ा और छाबरगांव नामक मौसम केंद्र को छोड़ कर शेष सभी 16 केंद्रों में किसानों से धोखाधड़ी की. राजनांदगांव में अगस्त में रेनफाल ट्रिगर 273 एमएम और सितंबर में 172 एमएम था.

इसे आम भाषा में समझा जाये तो इसका मतलब ये था कि 273 एमएम और 172 एमएम से अगर कम बारिश हुई तो प्रति एमएम कम बारिश के आधार पर किसानों को बीमा की रक़म का भुगतान किया जाना था, लेकिन बीमा कंपनी ने ऐसा नहीं किया और किसानों की करोड़ों रुपये की रक़म बीमा कंपनी दबा गई. केवल धान के ही आंकड़ों को देखें तो अकेले राजनांदगांव के 16 मौसम केंद्रों में किसानों को बीमा कंपनी ने 5,89,63,188.83 रुपये का कम भुगतान किया.

किसानों के साथ धान के अलावा काला चना, हरा चना, मक्का और सोयाबीन की फसलों की बीमा रकम में भी भ्रष्टाचार हुआ और इन फसलों में भी किसानों को 37,58,412.82 रुपये का कम भुगतान किया गया. लेकिन मामला अकेले राजनांदगांव ज़िले भर का नहीं है. पूरे राज्य में बीमा कंपनियों ने किसानों से लूट के लिये अलग-अलग तरीके अपनाये और किसानों को छला.

उदाहरण के लिये बिलासपुर ज़िले को लें. बिलासपुर के केड़ाडाड में जुलाई में तयशुदा 286 मिमी के मुकाबले 48.19 मिमी कम बारिश हुई, जिसके एवज में प्रति हेक्टेयर किसानों को 986.44 रुपये दिया जाना चाहिये था. बिजौरी मौसम केंद्र में जुलाई में 286 मिमी के बजाये 67.72 मिमी कम बारिश हुई, जिसके एवज में कंपनी को 1386.22 रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा देना था. इसी तरह अगस्त में 269 मिमी के बजाये 130.13 मिली कम बारिश हुई, जिसके एवज में किसानों को 2776.97 रुपये का मुआवजा मिलना था. मतलब ये कि बिजौरी मौसम केंद्र से संबद्ध गांवों के किसानों को प्रति हेक्टेयर 4163.19 रुपये का मुआवजा मिलना था. लेकिन बीमा कंपनी ने किसानों को ठेंगा दिखा दिया और मुआवजा बांटा ही नहीं.

इस पूरे मामले में किसानों ने कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक से शिकायत की लेकिन किसानों को आज तक इस फसल बीमा का भुगतान नहीं मिला.

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