बिजली कंपनियां निजी हाथों में

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ की बिजली कंपनियां निजी होने जा रही है. इस आशय का आदेश जारी कर दिया गया है. उल्लेखनीय है कि विद्युत सुधार अधिनियम 2003 में संशोधन कर साल 2013 में छत्तीसगढ़ विद्युत मर्यादित कंपनी को पब्लिक लिमिटेड कंपनी में परिवर्तित कर दिया गया था. अब 2016 में अधिनियम में संशोधन कर पुन: पब्लिक लिमिटेड कंपनी को प्राइवेट में बदलने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए कंपनी ने मंत्रीमंडल में सुधार की अनुमति मांगी थी. जिसे कैबिनेट में मंजूरी दे दी और ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है.

इस आदेश के बाद छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रेडिंग कंपनी लिमिटेड का निजीकरण कर दिया जायेगा.


ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार कंपनी अधिनियम 2013 की धारा-18 के प्रावधानों के परिपेक्ष्य में राज्य की पॉवर कंपनियों को पब्लिक कंपनी से प्राइवेट कंपनी में परिवर्तन के फलस्वरूप उक्त पांच पॉवर कंपनियों के वर्तमान स्वामित्व, देनदारियों, दायित्वों, ऋणों या अनुबंधों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा.

लेकिन ऊर्जा विभाग के विशेष सचिव द्वारा जारी आदेश में कर्मचारियों के सेवा शर्तों का उल्लेख नहीं किया गया है. जिसकी वजह से कर्मचारियों में वेतन, पेंशन सहित मिलने वाली अन्य सुविधाओं को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई हैं.

जानकारों का कहना है कि निजीकरण से बिजली कंपनियां कैग तथा सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर हो जायेंगी.

बहरहाल, इस आदेश के बाद इन कंपनियों में काम करने वाले 17 हजार कर्मचारी संशय की स्थिति में है. वहीं, कर्मचारी यूनियन इसका विरोध कर रही है.

कर्मचारी नेता बस्तर के नगरनार प्लांट के विनिवेश का उदाहरण देकर कह रहे हैं कि अभी वहां का विनिवेश शुरु भी नहीं हुआ है कि टाटा-अडानी जैसी कंपनियां वहां मंडराने लगी है.

छत्तीसगढ़ राज्य पावर कम्पनी का स्पष्टीकरण
राज्य सरकार के उपक्रम छत्तीसगढ़ राज्य पावर कम्पनी ने अपनी बिजली कम्पनियों के निजीकरण की खबरों को भ्रामक बताते हुए इस प्रकार के समाचारों का खण्डन किया है. छत्तीसगढ़ राज्य पावर कम्पनी के अधिकारियों ने सोमवार रायपुर में बताया कि ऊर्जा विभाग द्वारा 25 अक्टूबर 2016 को जारी आदेश के द्वारा सभी पांच विद्युत कम्पनियों को कम्पनी अधिनियम 2013 की धारा 18 सहपठित धारा 14 के अंतर्गत पब्लिक कंपनी से प्रायवेट कंपनी में परिवर्तन करने की अनुमति दी गई है.

अधिकारियों ने वस्तु स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि शासन के इस निर्णय से विद्युत कम्पनियों के निजीकरण का कयास लगाया जाना सर्वथा गलत है. इस तकनीकी परिवर्तन के बाद भी सभी पावर कम्पनियां छत्तीसगढ़ सरकार की शत-प्रतिशत स्वामित्व वाली कंपनियां यथावत बनी रहेंगी. इस संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सरकारी कंपनियों को अपने नाम में ’प्राइवेट’ शब्द लगाने की आवश्यकता नहीं है.

अधिकारियों के अनुसार शासन के इस आदेश में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इस परिवर्तन से कंपनियों के वर्तमान स्वामित्व देनदारियों, दायित्वों, ऋणों या अनुबंधों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा. इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पावर कंपनीज में शत प्रतिशत पूंजी छत्तीसगढ़ सरकार की ही रहेगी और कंपनी के सभी निदेशक सरकार द्वारा ही नियुक्ति किए जाएंगे. साथ ही वैधानिक अंकेक्षण, सीएजी आडिट, विधानसभा में वार्षिक लेखे प्रस्तुत करने, जनसूचना का अधिकार अधिनियम इत्यादि के संबंध में प्रावधान यथावत इन कम्पनियों पर लागू रहेंगे.

(छत्तीसगढ़ राज्य पावर कम्पनी का स्पष्टीकरण आने के बाद उसे मूल समाचार में जोड़ा गया है.)

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