छत्तीसगढ़ में कृषि नहीं उद्योगों पर जोर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में कृषि के बजाये उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है. कम से कम जल संसाधन विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से तिल्दा के पेंड्रावन जलाशय को अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड को सौंप दिये जाना तो यही इंगित करता है. छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग ने 3 जनवरी को अल्ट्राटेक सीमेंट को माइनिंग के लिये एनओसी दे दी है. जलाशय क्षेत्र में चरणबद्ध माइनिंग की इजाजत दी गई है. पहले चरण में कुल कैचमेंट एरिया के 10 फीसदी क्षेत्र में माइनिंग की इजाजत दी गई है. यह खनन पूरा होने के बाद दूसरे चरण में फिर 10 फीसदी तथा उसके बाद तीसरे चरण में शेष क्षेत्र में खनन शुरु करने की अनुमति दी गई है. इससे क्षेत्र के हजारों किसानों के साथ सिंचाई के भी प्रभावित होने की आशंका है. इसी के साथ जलाशय के अस्तित्व के समाप्त हो जाने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है.

रायपुर जिले के समीप तिल्दा क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जानी वाली पेंड्रावन जलाशय की कुल जलग्रहण क्षमता 25.47 वर्ग किलोमीटर की है. इसके मुख्य नहर की लंबाई 6.31 किलोमीटर है. इसकी कुल सिंचाई क्षमता 2600 हेक्टेयर की है.


गौरतलब है कि बीते साल छत्तीसगढ़ विधानसभा में 23 मार्च को यह मामला जोर-शोर से उठा था. सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के विधायकों ने इस जलाशय को उद्योग के हवाले करने का विरोध किया था. उस विरोध के चलते जल संसाधन मंत्री को फैसला निरस्त करने की घोषणा करनी पड़ी.

गौरतलब है कि 8 मार्च 2016 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश राज्य के वित्तीय वर्ष 2015-16 का आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, “वर्ष 2015-16 में स्थिर भावों में सकल राज्य घरेलू उत्पाद बाजार मूल्य पर वर्ष 2014-15 की तुलना में 7.07 प्रतिशत वृद्धि अनुमानित है. राज्य में कृषि एवं संबंधित क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, मत्स्य एवं वन) में 0.47 प्रतिशत, उद्योग क्षेत्र (निर्माण, विनिर्माण, खनन एवं उत्खनन, विद्युत, गैस तथा जल आपूर्ति सम्मिलित) में 7.07 प्रतिशत एवं सेवा क्षेत्र में 9.81 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है.”

विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि राज्य में कृषि क्षेत्र में 0.47 प्रतिशत तथा उद्योग क्षेत्र में 7.07 प्रतिशत वृद्धि हो रही है. इस तरह से कृषि प्रधान देश के राज्य छत्तीसगढ़ जिसे कभी धान का कटोरा कहा जाता था में कृषि क्षेत्र की विकास दर 1 प्रतिशत से भी कम है तथा उद्योग 7 प्रतिशत से भी ज्यादा की दर से विकास कर रहें हैं.

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