छत्तीसगढ़: हृदय रोगी खतरे में

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ भी स्टेंट की कृत्रिम कमी की स्थिति से गुजर रहा है.
हार्ट अटैक के बाद मरीजों की जान बचाने के लिये लगाये जाने वाले कॉरोनरी स्टेंट का अधिकतम मूल्य केन्द्र सरकार द्वारा 13 फरवरी 2017 से तय कर दिये जाने के बाद से छत्तीसगढ़ के अस्पतालों तथा बाजार से कॉरोनरी स्टेंट कंपनियों द्वारा वापस मंगा लिये गये हैं. कॉरोनरी स्टेंट की सप्लाई करने वालों ने छत्तीसगढ़ से दूसरे तथा तीसरे पीढ़ी के कॉरोनरी स्टेंट का वापस मंगा लिया गया है. जिससे अब मरीजों के पास एकमात्र पुराने जमाने के बेयर मेटल के कॉरोनरी स्टेंट ही एंजियोप्लास्टी के बाद लगाने का विकल्प रह गया है. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक इस कृत्रिम कमी को दूर करने के लिये कोई कदम नहीं उठाया गया है.

उल्लेखनीय है कि 13 फरवरी, 2017 को गजट नोटिफिकेशन के द्वारा केन्द्र सरकार के औषध विभाग ने बेयर मेटल से बने कॉरोनरी स्टेंट का अधिकतम मूल्य 7,260 रुपये तथा ड्रग कोटिंग एवं बाद में घुल जाने वाले कॉरोनरी स्टेंट का अधिकतम मूल्य 29,600 रुपये तय कर दिया है. जाहिर है कि जिस स्टेंट को 1.5 से 2 लाख रुपयों में बेचा जाता था उसका मूल्य 29 हजार 600 सौ रुपये तय कर दिये जाने के खिलाफ विरोध स्वरूप इसे किया जा रहा है.


हालांकि, कंपनियों ने साधारण स्टेंट को वापस नहीं मंगाया है जिससे जाहिर होता है कि वे सरकार को जतलाना चाहते हैं कि सस्ता इलाज चाहिये तो पुरानी बेयर मेटल की बनी स्टेंट का उपयोग करें. इस तरह से विदेशी कंपनियां तय करेंगी कि भारतीय मरीज का इलाज कैसे हो.

दरअसल, हृदय की वाहिनियों में अवरोध उत्पन्न होने पर वहां पर एक मेटल का बना स्टेंट लगा दिया जाता था. बाद में देखा गया कि सालभर बाद इसी स्टेंट के कारण हृदय की रक्त वाहिनियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं. इसलिये उन पर दवा की कोटिंग वाले तथा कुछ समय बाद घुल जाने वाले कॉरोनरी स्टेंट बनाया जाने लगा.

अब सरकारी तंत्र को इन स्टेंट बनाने वाली कंपनियों से जूझना पड़ेगा. वैसे जब केन्द्र सरकार ने कॉरोनरी स्टेंट का दाम तय किया तभी यह शर्त लगी दी कि वर्तमान में जो इन स्टेंट का उत्पादन कर रहें हैं या विदेशों से आयात कर रहें हैं वे बिना 6 माह की नोटिस दिये बिना इसे बंद या रोक नहीं सकते हैं. इसके बावजूद कॉरोनरी स्टेंट बनाने वाली कंपनियां वही काम कर रही है.

गौरतलब है कि देश में दवाओं के मूल्य तय करने वाली तथा उन पर निगरानी रखने वाली संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी ने कॉरोनरी स्टेंट का अधिकतम मूल्य तय करते ही राज्यों के दवा नियंत्रक तथा स्टेंट की सप्लाई करने वालों को आगाह कर दिया था कि किसी भी हालत में कॉरोनरी स्टेंट के नये मूल्यों की लेबलिंग के नाम पर इसकी कमी नहीं होनी चाहिये उसके बाद भी छत्तीसगढ़ में इसकी कृत्रिम कमी उत्पन्न करने का मौका दिया जा रहा है.

सबसे हैरत की बात है कि जब हिन्दी के एक दैनिक अखबार ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव सुब्रत साहू से इस बाबत बात की तो उन्होंने कहा कि वे अभी बाहर हैं, उऩके वापस आते ही स्टेंट के लिये निर्धारित दर लागू करवाई जायेगी.

नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी ने इस बात की भी अनुशंसा की है कि कॉरोनरी स्टेंट के नये मूल्यों की सूचना डीलरों तथा अस्पतालों को ई-मेल के द्वारा दी जाये ताकि अस्पतालों तथा डीलरों के यहां उपलब्ध कॉरोनरी स्टेंट का नया मूल्य उन्हें पता लग सके.
उल्लेखनीय है कि साल 2014 में अपने एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि नये तुरंत लागू किये जाने चाहिये.

केन्द्र सरकार की संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी ने इसी तरह की स्थिति से निपटने के लिये जनता के लिये ‘फार्मा जन समाधान’ खोल रखा है. जहां दवा या कॉरोनरी स्टेंट की कमी की सूचना दी जा सकती है.

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