गर्भवती को बीफ की सलाह, जांच के आदेश

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पताल में गर्भवती को बीफ खाने की सलाह देने की सरकार ने जांच के आदेश दे दिये हैं. छत्तीसगढ़ के कोरबा के एनटीपीसी अस्पताल में विगत दिनों चिकित्सक ने गर्भवती को दवा कंपनी फ्रेंको इंडिया द्वारा दिया गया एक ऐसा पर्चा बांटा जिसमें खून बढ़ाने के लिये बीफ खाने की सलाह दी गई थी. सरकारी अस्पताल में बीफ खाने की सलाह देने वाले पर्चे बांटे जाने पर जमकर बवाल हुआ है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में बीफ पर प्रतिबंध है इसके बावजूद एनटीपीसी के सरकारी अस्पताल में दवा कंपनी द्वारा दिये गये पर्चे को चिकित्सक ने बिना जांच किये गर्भवती महिला को सलाह के रूप दे दिया. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस घटना की जांच के आदेश दे दिये हैं.


उल्लेखनीय है कि हमारे देश में दवा कंपनियां मुनाफा कमाने के लिये जीवन रक्षक तथा आवश्यक दवा के बजाये गैर-जरूरी तथा अनावश्यक दवा बेचने पर ज्यादा जोर देती है. साथ में दवा कंपनियां अपने दवा के प्रचार के लिये चिकित्सकों के माध्यम से मुफ्त में दवा तथा पर्चे बांटने का काम भी करती है. जिस दवा कंपनी के द्वारा बीफ खाने की सलाह देने का पर्चा बांटा गया है, उसी की दवा डेक्सोरेंज को साथ में मुफ्त में बांटा गया है.

|| डेक्सोरेंज में आयरन तथा फोलिक एसिड का मिश्रण है जिससे खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है. बता दे कि खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाने का दावा करने वाली इस डेक्सोरेंज नामक दवा में साल 1971 से लेकर साल 2000 तक बूचड़खाने के खून से हीमोग्लोबिन लेकर मिलाया जाता रहा है. ||

इधर एनटीपीसी अस्पताल के सीएमओ डॉ. लोकेश महिंद्रा ने कहा कि वे सोमवार को छुट्टी पर थे, उनकी जानकारी में मंगलवार को यह मामला आया कि अस्पताल में डेक्सोरेंज का ऐसा पर्चा वितरित हुआ है जिसमें स्पष्ट तौर पर बीफ का उल्लेख है, यह पीड़ादायक होने के साथ-साथ आपत्तिजनक है. उन्होंने कहा कि हमारे अस्पताल के डॉक्टर व स्टाफ ने पर्चे में छपे आपत्तिजनक शब्द पर ध्यान नहीं दिया होगा.

इधर इस मामले सीएमएचओ डॉ. पीएस सिसोदिया ने कहा है कि शासकीय व अर्धशासकीय अस्पतालों में जेनेरिक दवाईयां अनिवार्य है, गैर जेनेरिक दवाईयों का प्रचार गलत है, ड्रग नीति के तहत नियम विरूद्ध है. इसकी लिखित शिकायत होने पर कार्रवाई की जा सकती है, दवाई कंपनियों को प्रचार में आपत्तिजनक शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करना भी गलत है.

डेक्सोरेंज में आयरन तथा फोलिक एसिड का मिश्रण है जिससे खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है. बता दे कि खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाने का दावा करने वाली इस डेक्सोरेंज नामक दवा में साल 1971 से लेकर साल 2000 तक बूचड़खाने के खून ने हीमोग्लोबिन लेकर मिलाया जाता रहा है.

जिससे इस दवा को पीने वाले मरीज के खून में संक्रमण होने की आशंका बनी रहती थी. इसके बावजूद दवा कंपनी की हठधर्मिता के कारण करीब तीन दशक तक इस संदेहजनक दावे वाले दवा को भारतीय जनमानस को पिलाया जाता रहा है. जिसका स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले संगठन लगातार विरोध करते रहे हैं. अंत में दवा कंपनी ने बूचड़खाने से हीमोग्लोबिन लाकर दवा बनाने के स्थान पर उसमें आयरन मिलाया गया. अभी बाजार में जो दवा उपलब्ध है उसमें आयरन तथा फोलिक एसिड मिला हुआ है.

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विशेषज्ञों का कहना है कि एनटीपीसी जैसे सरकारी अस्पताल में गर्भवती महिला को खून बढ़ाने के लिये आयरन की गोली देना चाहिये, जो अस्पताल में उपलब्ध रहती है. लेकिन इसके उलट बीफ जैसी सलाह एक बड़े वर्ग को आहत कर सकती है, इस दिशा में सावधानी बरतने की जरुरत है.

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