छत्तीसगढ़ के जेलों की हालत बदतर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जेलों की हालत रेल गाड़ी के जनरल बोगी जैसी है. छत्तीसगढ़ के 5 केन्द्रीय जेलों में दो गुना से भी ज्यादा कैदी भरे पड़े हैं. छत्तीसगढ़ स्थित केन्द्रीय जेलों की क्षमता 5,883 कैदियों की है. लेकिन इसमें 13,093 भरे हुये हैं. इस तरह से छत्तीसगढ़ के केन्द्रीय जेलों की हालत भारतीय रेलवे के जनरल बोगी के समान है जहां ठूस-ठूसकर यात्री भरे हुये होते हैं.

गौरतलब है कि फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जेलों में सुधार किस तरीके से हो इस पर कोर्ट पिछले 35 सालों से फैसले सुनाता रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश का संविधान सभी को गौरव से जीवन जीने का अधिकार देता है वहीं देश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के जीवन में रत्ती भर सुधार ही आ पाया है.


बता दें कि 13 जून 2013 के पूर्व CJI आरसी लाहोटी ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा था कि जेल में बंद कैदियों की जिंदगी परेशान करने वाली है. उन्होंने जेल में बंद 1382 कैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव का हवाला दिया था और कोर्ट ने इस पत्र को जनहित याचिका में तब्दील कर मामले की सुनवाई शुरू की थी.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित केन्द्रीय जेल रायपुर की क्षमता 1190 कैदियों की है परन्तु इसमें 3275 कैदी बंद हैं. उल्लेखनीय है कि रायपुर के केन्द्रीय जेल में 22 नवंबर 2016 को एक कैदीनरेन्द्र कुमार साहू ने दूसरे कैदी वेगराम साहू को कैंची से गोदकर मार डाला था. इसके बाद 24 नवंबर 2016 को रायपुर जेल में प्रसासन छापा मारा तथा जेस अधीक्षक राजेन्द्र गायकवाड़ को निलंबित कर दिया था.

केन्द्रीय जेल जगदलपुर की क्षमता 1139 कैदियों की हैं. इसमें 1967 कैदी बंद हैं. केन्द्रीय जेल बिलासपुर की क्षमता 1328 कैदियों की है परन्तु इसमें 3397 कैदी बंद हैं. केन्द्रीय जेल अंबिकापुर की क्षमता 1020 कैदियों की है परन्तु इसमें भी 2340 कैदी बंद हैं. इसी तरह से केन्द्रीय जेल दुर्ग की क्षमता 1206 कैदियों की है और इसमें 2114 कैदी बंद हैं.

साल 2015-16 में छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद 50 कैदियों की मौत हो गई थी जिसमें से 1 विचाराधीन कैदी ने आत्महत्या कर ली थी. साल 2016-17 में जनवरी माह तक 48 कैदियों की मौत हो चुकी है जिसमें से 2 दंडित बंदियों ने आत्महत्या कर ली है.

फरवरी 2016 में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम दिशानिर्देश जारी किये थे-

* सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विचाराधीन कैदियों को लेकर बनाई गई कमेटी हर तीन महीने में मीटिंग करे. डिस्ट्रिक्ट लीगल सेल कमेटी का सचिव कमेटी में शामिल हो और वह विचाराधीन कैदियों, सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई को लेकर कदम उठाये.

* कमेटी उन विचाराधीन कैदियों की रिहाई के लिए कदम उठाये जो गरीबी की वजह से बेल बांड नहीं भर पा रहे हैं.

* कमेटी उस कानून का पालन करने का भी प्रयास करने जिसके तहत पहली बार अपराध करने वाले अपराघी को सामाजिक मुख्य धारा में लौटने का मौका दिया जाता है.

* गरीब विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों के लिए वकीलों की नियुक्ति हो. DGP या जेल का IGP कैदियों के स्वास्थ्य, भोजन, कपड़े का विशेष ध्यान रखे और तय करे कि कैदियों की जिंदगी गौरवपूर्ण तरीके से चले.

* कोर्ट ने महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर कहा है कि मंत्रालय बाल सुधार गृह में रहने वाले नाबालिगों की हालत को सुधारने के लिए नियम बनाये.

* सुप्रीम कोर्ट इस आदेश के बाद जेलों में बंद कैदियों की अप्राकृतिक मौत, जेलों में स्टाफ की कमी और जेल स्टाफ के उचित परीक्षण पर सुनवाई करेगा.

फोटो: प्रतीकात्मक

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