रायपुर से सबसे ज्यादा बच्चे लापता

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा बच्चे रायपुर से लापता होते हैं. पिछले 4 सालों में पूरे राज्य से 284 नाबालिक बच्चे लापता हुये थे उनमें से रायपुर से ही 69 बच्चे लापता हुये हैं. इस तरह से करीब 24 फीसदी नाबालिक बच्चे राजधानी रायपुर से ही लापता हुये हैं. रायपुर से पिछले 4 सालों में 42 नाबालिक बालक तथा 27 नाबालिक बालिकायें लापता हुई हैं. इससे जाहिर होता है कि छत्तीसगढ़ में राजधानी रायपुर बच्चों के लिये सबसे असुरक्षित हैं क्योंकि यहीं से सबसे ज्यादा बच्चे लापता होते हैं.

राजधानी रायपुर के बाद सबसे ज्यादा बच्चें बलौदाबाजार से 31 लापता हैं. उसके बाद दुर्ग से 27, रायगढ़ से 26 तथा जांजगीर-चांपा से 25 बच्चे लापता हैं. नाबालिक बालत के लापता होने में रायपुर के बाद दुर्ग का नंबर आता है जहां से 17 बालक लापता हैं तथा बालिकाओं के मामले में रायगढ़ से 20 नाबालिक बालिका लापता हैं.


छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले से साल 2010 से लेकर 6 फरवरी 2015 तक 2358 बच्चे तथा 3329 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं. सरकारी आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ से पिछले पांच सालों में कुल 14,118 बच्चे तथा 19,670 लड़कियां तथा महिलायें लापता हुई हैं.

ऐसा नहीं है कि रायपुर से सबसे ज्यादा बच्चे ही लापता होते हैं. अन्य सभी के लापता होने के मामले में भी रायपुर सबसे शीर्ष पर है. पिछले साल याने 2016 में राजधानी रायपुर से 1701 लोग लापता हुये थे. इस तरह से रायपुर से रोज औसतन 4.6 लोग लापता होते हैं.

पूरे छत्तीसगढ़ से पिछले साल कुल जितने लोग लापता हुये थे इसमें से रायपुर से ही करीब 17 फीसदी लापता हुये थे. रायपुर से पिछले साल 1701 लोग लापता हुये थे जिसमें से 1217 लोग वापस आ गये. उसके बाद भी 484 लोग लापता हैं. लापता होने के बाद अब तक लापता के मामले में भी रायपुर राज्य का सिरमौर है. ऐसे में रायपुर को छत्तीसगढ़ का लापतागंज कहा जाये तो गलत क्या है?

दरअसल, छत्तीसगढ़ से बच्चों की तस्करी करके उन्हें अन्य राज्यों में ले जाकर बेच दिया जाता है. जहां पर उनसे घरेलू नौकर का काम कराया जाता है. न तो उन्हें पगार दी जाती है और न ही उन्हें भरपेट खाने दिया जाता है.

देश की राजधानी दिल्ली में तो कई ऐसी कथित प्लेसमेंट एजेंसियां काम कर रही हैं जो इस तरह से बच्चों की तस्करी करके उन्हें आसपास के बड़े शहरों में बेच दिया जाता है.

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