पद्मश्री पुनाराम निषाद नहीं रहे

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पंडवानी गायक पद्मश्री पुनाराम निषाद का शनिवार को निधन हो गया. उनका इलाज राजधानी रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में चल रहा था. उऩकी उम्र 76 साल की थी. अमरीका, कनाडा, इंग्लैंड, पेरिस सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके इस कलाकार का परिवार रोजी-मजदूरी से चलता था.

उनकी कला को देखते हुए 1974 में तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन ने उन्हें ताम्रपत्र देकर नवाजा था. पंडवानी गायन के लिये पुनाराम निषाद को 2005 में पद्मश्री मिला था.


रायपुर से करीब 30-35 किलोमिटर दूर स्थित एक आश्रम में पुनाराम रहते थे. वे काफी दिनों से बीमार चल रहे थे. उन्होंने अपने जीवनकाल में छत्तीसगढ़ का नाम दुनियाभर में पहुंचाया. जीवन के अंतिम समय में वे अत्यंत गरीबी में जी रहे थे. उनके पास इलाज के लिये भी पैसे नहीं थे.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पुनाराम निषाद के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. डॉ. सिंह ने कहा है कि श्री निषाद के निधन से छत्तीसगढ़ में महाभारत कथा गायन की लोकप्रिय विधा ‘पंडवानी’ के एक सुनहरे युग का अंत हो गया है. श्री निषाद पंडवानी की वेदमती शैली के लोकप्रिय गायक थे.

मुख्यमंत्री ने कहा – स्वर्गीय श्री पुनाराम निषाद ने अपनी विलक्षण प्रतिभा के बल पर पंडवानी को देश-विदेश में जन-जन तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया. राज्य की लोक-संस्कृति के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. मुख्यमंत्री ने उनके शोक-संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति प्रकट की है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है.

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