शराब का विरोध शबाब पर

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में शराब का विरोध अपने पूरे शबाब पर है.महिलायें शराब दुकान खोले जाने का सड़कों पर विरोध कर रही है. वहीं, विपक्षी कांग्रेस इसे सदन में मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है. कांग्रेस, सरकार द्वारा शराब बेचने के निर्णय पर स्थगन प्रस्ताव लाने की बात कर रही है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाइवे से शराब दुकाने हटाने के निर्देश दिये जाने के बाद छत्तीसगढ़ की 416 शराब दुकानों को हाइवे से हटाना पड़ सकता है. इऩ दुकानों को जहां स्थानांतरित करने का प्रयास किया जा रहा है वहां की आबादी इसका विरोध कर रही है.

इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा उन शराब दुकानों को खुद संचालित करने जा रही है जिसका राजनीतिक के गलियारों में कड़ी आलोचना हो रही है.


दूसरी तरफ, राज्यभर में महिलायें इन शराब दुकानों को खोले जाने का सबसे ज्यादा विरोध कर रही हैं. शनिवार को रायपुर से लगे बीरगांव में महा पंचायत बुलाई गई थी जिसमें हजारों महिलाओं ने शिरकत की. आरंग में शराब दुकान खोलने के खिलाफ अखिल भारतीय क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.

इसी माह के पहले सप्ताह में अंबिकापुर के बतौली के महिलाओं ने शराब दुकान खोले जाने का जमकर विरोध किया था. उन्होंने कहा कि यदि यहां शराब की दुकान खुली तो वे फिर से खुले में शौच करने लगेंगी. गौरतलब है कि बतौली को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है. यह वहां की महिलाओं के समर्थन के कारण ही संभव हो पाया है. अब महिलायें बतौली में शराब दुकान खोले जाने का विरोध कर रहीं है तथा उनकी बात न मानने पर सरकारी योजनाओं की बहिष्कार की बात कही थी.

इसके अलावा सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शराब बेचे जाने के निर्णय का विरोध किया जा रहा है. सोशल मीडिया पर तंज कसे जा रहें हैं कि-

* “चाउर वाले बाबा अब दारु वाले बाबा के नाम से जाने जायेंगे”,

* “सरकार शराब बेचेगी यदि पत्नी पति का मदिरा सेवन का विरोध करेगी तो यह ‘शासकीय कार्य में बाधा’ माना जायेगा”,

* “शराब की खाली बोतल को समर्थन मूल्य पर खरीदा जायेगा”.

बता दें कि 24 जनवरी, 2016 को छत्तीसगढ़ सरकार के कैबिनेट ने निर्णय लिया था कि कि देशी तथा विदेशी शराब की फुटकर बिक्री सार्वजनिक उपक्रम के द्वारा की जायेगी. इस आशय का संशोधन आबकारी एक्ट में किया गया है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि नेशनल हाइवे से लगी दुकानें सड़क से 500 मीटर के दायरे में नहीं होंगी. ऐसे में राज्य की 416 दुकानों के ठेकेदार दुकान चलाने के इच्छुक नहीं हैं. अब इन दुकानों से जो घाटा होगा, उसे पूरा करने के लिये ही सरकार द्वारा कार्पोरेशन का गठन किया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि साल 2015-16 में राज्य सरकार को कुल 69972 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था जिसमें आबकारी विभाग की भागीदारी 3347.54 करोड़ रुपया था. इस तरह से राजस्व की प्राप्ति में आबकारी विभाग की भागीदारी महज 5 फीसदी से भी कम रही है.

राज्य स्थापना के समय आबकारी से 32.16 करोड़ का राजस्व मिला था जो 16 साल में बढ़कर 3347.54 करोड़ का हो गया है.

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