‘नोटबंदी ने हमारा निवाला छीन लिया’

रायपुर | संवाददाता: रमन राज में चावल मिल जाता है काम नहीं मिलता. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में काम की तलाश में अभनपुर से चावड़ी आई रेजा मीराबाई का यह कहना है. मेहतरीन बाई बताती है कि उसने जीवनभर रेजा का ही काम किया है कभी भी ऐसा दिन नहीं आया जब काम मिलने की तंगी हो. लेकिन आजकल काम नहीं मिल पा रहा है उस पर पुलिस डंडा अलग चला रही है. अभनपुर से ही आये धर्मदास ने कहा कि पिछले 50 दिनों में केवल 12 दिन ही काम मिल पाया है. दरअसल, नोटबंदी के बाद उपजी नगदी की समस्या के कारण निर्माण कार्य बंद से पड़ गये हैं. लोगों के पास रोजी या साप्ताहिक मजदूरी देने के लिये चिल्हर पैसे न होने के कारण भवन निर्माण कार्य ठप्प पड़े हैं. जिसके चलते रोजी से प्राप्त रोटी पर गुजारा करने वाले भुखमरी की कगार पर पहुंच गये हैं.

रायपुर के चावड़ी में बैठे कुछ अन्य मजदूरों का कहना है कि आज 53वां दिन है जिसमें से हमें केवल 10 दिन ही काम मिल सका है. उनका कहना है कि गरीबों के निवाले की किसे फ्रिक है. वोट मांगते समय सभी दल के लोग रिश्तेदारी निकालने लगते हैं. वहां पर बैठे अधिकांश मजदूरों का मानना है कि नोटबंदी ने उनके मुंह का निवाला छीन लिया है. इन्हीं मजदूरों का कहना है कि नोटबंदी के पहले उन्हें भरपेट खाना मिल जाता था आज रोटी के लाले पड़े हैं.


काम की तलाश में बेबसी से इंतजार करके मजदूरों का दर्द है कि उन्हें रोज कमाना-खाना है. उन्हें किसी पार्टी से कोई मतलब नहीं है. अर्थव्यवस्था के सूत्रों से अनजान होने के बावजूद भी वे विश्वास से भरे कहते हैं कि गरीब को काम नहीं मिलेगा तो छत्तीसगढ़ का विकास कैसे होगा, देश का विकास कैसे होगा.

अपना दर्द बयां करते हुये वे कहते हैं कि हम दूर-दूर से आते हैं, अपने गहने गिरवी रखकर, काम की तलाश में. परन्तु यहां आकर किसी भंडारे में आकर खा लेते हैं. घर में बच्चे हैं उनके लिये रोटी का जुगाड़ कहां से करें. हमारा परिवार भूके मर रहा है कोई पूछने तक नहीं आता है.

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