नये बजट में कृषि और स्वास्थ्य पर ज़ोर

श्रम एवं समाज कल्याण
50. निराश्रितों, बुजुर्गाें, विधवा महिलाओं एवं निःशक्त व्यक्तियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना कल्याणकारी राज्य का प्राथमिक दायित्व है.
51. इन दायित्वों की निर्बाध पूर्ति के लिये सामाजिक सुरक्षा और कल्याण
मद में 352 करोड़, वृद्धावस्था पेंशन योजना में 185 करोड़ और मुख्यमंत्री पेंशन योजना मेें 150 करोड़ का प्रावधान है. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना में 68 करोड़ तथा सुुखद सहारा योजना में 100 करोड़ का प्रावधान है.
52. दिव्यांगजनों के लिये निःशक्तजन पुनर्वास केन्द्र, मादक द्रव्यों एवं पदार्थाें की रोकथाम एवं नशामुक्ति केन्द्र का संचालन तथा तृतीय लिंग समुदाय से संबंधित योजनाओं हेतु 5 करोड़ 30 लाख का प्रावधान है.
53. असंगठित श्रमिक सुरक्षा एवं कल्याण मण्डल हेतु 38 करोड़ 50 लाख का प्रावधान है.
54. ठेका मजदूर, घरेलू कामकाजी महिला एवं हम्माल कल्याण मण्डल हेतु 15 करोड़ का प्रावधान है.

औद्योगिक विकास
55. नई औद्योगिक नीति 2019 का मुख्य उद्देश्य समावेशी विकास, आत्मनिर्भरता एवं परिपक्व अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है.
56. नई औद्योगिक नीति में नवीन तकनीकों पर आधारित रोबोटिक्स, एयरक्राफ्ट रिपेयरिंग, धान से जैव ईंधन अथवा इथेनॉल निर्माण, सब्जी एवं फल प्रसंस्करण तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण/मरम्मत में लगने वाले उपकरणों के निर्माण से संबंधित उद्योगों को उच्च प्राथमिकता दी गई है.
57. उद्योगों के लिये आबंटित किये जाने वाले भू-खण्ड की दरों में 30 प्रतिशत तथा लीज रेन्ट की दर में 33 प्रतिशत कमी की गई है.
58. राज्य में उत्पादित होने वाले हर्बल, वनौषधि तथा लघु वनोपज आधारित उद्योगों को अधिकतम ब्याज अनुदान, नेट एसजीएसटी क्षतिपूर्ति, स्टाम्प ड्यूटी छूट एवं विद्युत शुल्क में छूट देने की व्यवस्था है.
59. स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये शासकीय खरीदी सीएसआईडीसी के पोर्टल ई-मानक पर पंजीकृत स्थानीय इकाईयों से किया जाना अनिवार्य किया गया है.


60. राज्य के हस्तशिल्पियों, बुनकरों, मिट्टी तथा कांसा धातुओं के लघु उद्यमियों/कलाकारों के उत्पादों को भी ई-मानक के द्वारा विपणन सुविधा देने का निर्णय लिया गया है.
61. अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बस्तर क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये 20 एकड़ तक के निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है.
62. राज्य में उत्पादित सब्जी, फल एवं मोटे अनाजों को प्रसंस्कृत कर मूल्य संवर्धन वाले उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए नये फूड पार्क की स्थापना हेतु नवीन मद में 50 करोड़ का प्रावधान है.
63. नये औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 15 करोड़ एवं जेम ज्वेलरी पार्क की स्थापना के लिए 1 करोड़ का प्रावधान है.
64. उद्योगों की स्थापना पर दी जाने वाली लागत पूंजी अनुदान के लिये 100 करोड़ एवं ब्याज अनुदान के लिये 39 करोड़ का प्रावधान है.

नगरीय प्रशासन एवं विकास
65. 13 नगर निगम क्षेत्र के निवासियों के लिये मुख्यमंत्री मितान योजना प्रारंभ की जा रही है. इसके तहत नगरीय प्रशासन, राजस्व, श्रम एवं स्वास्थ्य आदि विभिन्न विभागों की 100 से अधिक सेवाओं का लाभ नागरिकों को उनके घर पर मितान के माध्यम से उपलब्ध कराने की योजना है. इस हेतु 10 करोड़ का प्रावधान है.
66. शहरी नागरिकों की बुनियादी समस्याओं का निराकरण वार्ड स्तर पर करने के लिये मुख्यमंत्री वार्ड कार्यालय योजना प्रारंभ की गई है. वार्ड कार्यालयों के द्वारा सड़क एवं नालियों का निर्माण एवं साफ सफाई, उद्यानों एवं सामुदायिक भवनांे का रख-रखाव तथा पेयजल से संबंधित समस्याओं का निराकरण किया जा सकेगा. साथ ही, भवन अनुज्ञा, दुकान पंजीयन, विद्युत अनापत्ति प्रमाण पत्र संबंधी आवेदन पत्र एवं अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त हो सकेगी. इस हेतु 5 करोड़ का प्रावधान है.
67. साप्ताहिक हाट-बाजार एवं पौनी-पसारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अभिन्न अंग है. बढ़ते शहरीकरण के परिणामस्वरूप पौनी-पसारी के परम्परागत व्यवसाय एवं व्यवसायी धीरे-धीरे खतम हो रहे हैं. इसके लिये सभी 166 नगरीय निकायों में पौनी-पसारी योजना प्रारंभ की गई है. प्रति इकाई 30 लाख की लागत से 255 पौनी-पसारी बाजारों का निर्माण किया जायेगा. इसके लिए 30 करोड़ का प्रावधान है.
68. नगरीय क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के लिए 489 करोड़, स्मार्ट सिटी योजना के लिए 396 करोड़, अमृत मिशन के लिए 300 करोड़ एवं राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के लिए 50 करोड़ का प्रावधान है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!