प्रतिबंध के बाद भी छत्तीसगढ़ में चीनी किट से जांच

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में प्रतिबंध के बाद भी चीनी कंपनी के रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट किट के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि राज्य सरकार से कहां चूक हुई है, इसकी पूरी जांच की जानी चाहिये.

उन्होंने कहा-“कोरोना से उपजी परिस्थितियों से निपटने के लिये राज्य सरकार की कोई तैयारी नहीं है. सरकार के दावे खोखले हैं. ऐसे में अब प्रतिबंध के बाद भी रैपिड टेस्ट के लिये चीनी किट का उपयोग दुर्भाग्यजनक है. इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिये.”


गौरतलब है कि चीनी कंपनी गुआंगझोऊ वोंडफो बायोटेक और झूहाई लिवजॉन डायग्नोस्टिक रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट किट को लेकर शिकायत के बाद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने पिछले मंगलवार को इन पर दो दिनों के लिये प्रतिबंध लगा दिया था.

आईसीएमआर का कहना था कि कुछ जगहों पर इसकी एक्यूरेसी 6% और कुछ पर 71% पाई गई थी.

आईसीएमआर ने कहा था कि टेस्टिंग किट में रिजल्ट सही नहीं आ रहे हैं. किट की जांच होगी और उसके बाद ही टेस्ट की अनुमति दी जाएगी.

हालत ये हुई कि अब सोमवार को आईसीएमआर ने सारे राज्यों को चीनी कंपनी के रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट किट को वापस करने के निर्देश जारी किये हैं.

लेकिन प्रतिबंध के दौर में भी छत्तीसगढ़ में इसी चीनी रैपिड एंटीबॉडी ब्लड टेस्ट किट का उपयोग जारी रहा.

बिलासपुर ज़िले में तो एक दिन पहले तक वरिष्ठ अधिकारियों, विधायक और पत्रकारों की जांच भी चीनी किट से ही की गई.

बिलासपुर के पत्रकार सतीश यादव ने कहा-“जब शनिवार को मेरी जांच की गई, उसी समय मैंने इसे लेकर सवाल उठाये. छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने कहा कि इसका उपयोग नहीं करने के निर्देश दिये गये हैं. लेकिन मैदानी अमला धड़ल्ले से इसी चीनी किट का उपयोग करता रहा.”

ख़बर है कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में कोरोना का हॉटस्पॉट बने कोरबा में भी इसी चीनी किट से ही रैपिड टेस्ट किया था.

हालांकि राज्य सरकार का दावा है कि रविवार को राज्य सरकार को 25 हज़ार कोरियन रैपिड टेस्ट किट मिले हैं, जिन्हें अलग-अलग ज़िलों में भिजवा दिया गया है. लेकिन इस बीच चीनी किट से जांच किन परिस्थितियों में की गई, इस पर कोई जवाब नहीं देना चाहता.

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