चिटफंड घोटाला : 50 हज़ार करोड़ में से 7 करोड़ वापस

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में चिटफंड कंपनियों के मामले में अब पिछली सरकार के मंत्रियों और कलेक्टरों पर भी कार्रवाई हो सकती है. विपक्ष में रहते हुये भूपेश बघेल ने चिटफंड घोटाले में शामिल अफ़सरों और मंत्रियों के ख़िलाफ़ सबूत मिलने का दावा किया था.

भूपेश बघेल ने कहा था कि अगर उनकी सरकार आई तो इन मंत्रियों और अफसरों को जेल भेजा जायेगा.



सरकार में आने के लगभग दो साल बाद भूपेश बघेल ने चिटफंड कंपनियों द्वारा किये गये कथित रुप से 50 हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले में से सात करोड़ 33 लाख रुपये निवेशकों को वापस करवाने का काम किया है.

राजनांदगांव की चिटफंड कंपनी याल्स्को रियल स्टेट एंड एग्रो फार्मिग लिमिटेड के निवेशकों को धनतेरस के दिन यह रकम वापस की गई है. सरकार इसे बड़ी उपलब्धि की तरह देख रही है.

इस कंपनी के डायरेक्टरों के स्वामित्व की कुल 292.36 एकड़ अचल संपत्ति पाई गई थी. विशेष न्यायालय से आदेश के बाद इसकी नीलामी कराई गई, जिससे आठ करोड़ 15 लाख 34 हजार 345 रुपये प्राप्त हुए थे. हालांकि कुल 17 हजार 171 निवेशकों ने 24 करोड़ 75 लाख 47 हजार 337 रुपये का दावा प्रस्तुत किया था. लेकिन अभी सरकार ने इसमें से केवल एक तिहाई लोगों को ही उनकी रकम लौटाने का काम किया है.


सरकार का दावा है कि सत्ता में आने के बाद से भूपेश बघेल की सरकार ने लगभग दो वर्षों में कुल 34 कंपनियों के विरूद्ध धोखाधड़ी की शिकायत प्राप्त होने पर 63 प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्यवाही करते हुये 43 डायरेक्टरों, 08 पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर तत्काल न्यायालय प्रस्तुत किया गया.

विगत 02 वर्षों में वर्ष 2018 के पूर्व के प्रकरणों में से कुल 43 प्रकरणों के 80 आरोपियों को अन्य राज्यों से गिरफ्तार कर लाया गया है, जिनमें मध्यप्रदेश के 39 आरोपी, महाराष्ट्र के 09 आरोपी, राजस्थान के 05 आरोपी, ओड़िशा के 09 आरोपी, दिल्ली के 07 आरोपी, पश्चिम बंगाल के 02 आरोपी, उत्तर प्रदेश के 07 आरोपी, बिहार के 02 आरोपी शामिल हैं.

राज्य में वर्ष 2018 तक किसी भी कंपनी की संपत्ति की नीलामी नहीं किया गया था और न ही कोई राशि जप्त की गई थी. वर्ष 2019 में पुलिस द्वारा चिटफण्ड कंपनियों एवं उनके डायरेक्टरों की चल-अचल सम्पत्ति के पहचान की लगातार कार्यवाही करके कुल 123 प्रकरणों में कुर्की की कार्यवाही हेतु जिला कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा गया. जिला कलेक्टरों द्वारा 29 अनियमित वित्तीय संस्थानों, डायरेक्टरों की सम्पत्ति को कुर्की का अंतिम आदेश हेतु न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया.


इसमें से अब तक 17 प्रकरणों में न्यायालय द्वारा कुर्की का अंतिम आदेश पारित कर नीलामी, वसूली की कार्यवाही कर 09 करोड़ 04 लाख 40 हजार 220 रूपये शासन के खाते में जमा की गई. कुल 10 निवेशकों को कुल 22 लाख 94 हजार 243 रूपये वापस की गई. 02 प्रकरणों में नीलामी वसूली की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. 84 प्रकरणों में जिला कलेक्टर द्वारा कुर्की का अंतरिम आदेश हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है.

माना जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में दूसरी कंपनियों के निवेशकों को भी पैसा वापस लौटाने का काम करेगी.


इसके अलावा घोटाले में शामिल मंत्रियों और कलेक्टरों पर भी पंजा कसा जा सकता है.

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