गिधमुड़ी पतुरिया कोल ब्लॉक को वन विभाग की हरी झंडी

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने गिधमुड़ी पतुरिया कोल ब्लॉक खनन पर मुहर लगा दी है. कोरबा ज़िले के गिधमुड़ी और पतुरिया डांड कोयला खदान, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी को आवंटित किया गया है. ख़बर है कि चीफ वाइल्फ लाइफ वार्डन के कार्यालय ने इस कोयला खनन को हरी झंडी दे दी है. वाइल्ड लाइफ कार्यालय ने गुरुवार को इसे सहमति के लिये भू-प्रबंधन को भेजा है.

विपक्ष में रहते हुये मुख्यमंत्री भूपेश ने दावा किया था कि अगर गिधमुड़ी और पतुरिया कोल ब्लॉक शुरू हो गया तो हसदेव अरण्य वन क्षेत्र का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा.


कोरबा ज़िले के गिधमुड़ी और पतुरिया डांड कोयला खदान, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी को आवंटित किया गया है. विपक्ष में रहते हुये एमडीओ यानी माइन डेवलपर कम ऑपरेटर का विरोध करने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार ने कुछ महीने पहले ही इसे निविदा के बाद एमडीओ के आधार पर ही अडानी को दे दिया है.

अडानी की कंपनी कुछ दूसरी कंपनियों के साथ मिल कर इस कोयला खदान में एमडीओ यानी माइन डेवलपर कम ऑपरेटर के तौर पर कोयला खनन का काम करेगी.

भूपेश बघेल के गंभीर आरोप

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब विपक्ष में थे तो उन्होंने एमडीओ आधार पर कोल ब्लॉक आवंटन को बड़ा घोटाला बताया था. उन्होंने खास तौर पर गिधमुड़ी पतुरिया कोल ब्लॉक खनन को लेकर गंभीर आपत्ति जताई थी.


उन्होंने 27 मार्च 2018 को एक पत्रकार वार्ता में तत्कालीन भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाये थे.

उन्होंने कहा था कि पतुरिया गिधमुड़ी कोल ब्लॉक भैया थान पॉवर प्रोजेक्ट के लिए आबंटित किया गया है. यह पॉवर प्रोजेक्ट इंडिया बुल्स के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ सरकार को बनाना था, लेकिन यह परियोजना शुरू ही नहीं हो सकी और इंडिया बुल्स वापस चली गई.

भूपेश बघेल ने कहा था कि जब परियोजना ही नहीं है, तो फिर कोयला क्यों निकाला जाएगा?

कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने कहा था कि पतुरिया गिधमुड़ी कोल ब्लॉक हसदेव नदी के कैचमेंट एरिया में आता है. अगर यह कोल ब्लॉक शुरू हो गया तो हसदेव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा.

गिधमुड़ी पतुरिया डांड

कोरबा ज़िले का गिधमुड़ी पतुरिया कोल ब्लॉक 1751.92 हेक्टेयर में फैला हुआ है. इस में 954.871 हेक्टेयर इलाका वन भूमि और 523.822 हेक्टेयर राजस्व वन भूमि है. यानी 1751.92 हेक्टेयर में से 1463.693 हेक्टेयर वन भूमि है.

पिछले साल 17 मार्च को कटघोरा के वन मंडलाधिकारी ने यह कहते हुये पहले ही खनन को लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया था कि यह इलाका न तो राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य या प्रस्तावित हाथी कॉरीडोर का भाग है और ना ही प्रस्तावित है.

भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री रमन सिंह के कार्यकाल में जारी इस अनापत्ति प्रमाण पत्र में इस बात का उल्लेख नहीं है कि इस इलाके जंगली हाथी लगातार विचरण करते हैं और यह बरसों से उनके आने-जाने का रास्ता रहा है. यहां तक कि राज्य का वन विभाग भी इस इलाके में हाथी से होने वाले नुकसान के बदले मुआवजा देता रहा है.

One thought on “गिधमुड़ी पतुरिया कोल ब्लॉक को वन विभाग की हरी झंडी

  • September 7, 2019 at 12:21
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    छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और बताना चाहिए कि किन परिस्थितियों में कांग्रेस पार्टी की सरकार को भी एमडीओ जैसा रास्ता अख़्तियार करना पड़ा. अगर आप ध्यान से देखें तो एमडीओ असल में कोलगेट 2 है और यह अंततः निजी कंपनियों को ही लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किया गया ग़ैरक़ानूनी रास्ता है.
    हसदेव-अरण्य इलाके में कोयला उत्खनन से पर्यावरण संकट तो पैदा होगा ही, इससे हसदेव नदी और मिनीमाता बांगो बैराज का पूरा इलाका प्रभावित होगा और राज्य के सर्वाधिक सिंचित जांजगीर-चांपा ज़िले में जल संकट पैदा हो जाएगा.
    -सुदीप श्रीवास्तव की टिप्पणी
    https://www.bbc.com/hindi/india-47672198

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