मिर्जापुर का कलेक्टर

चंचल बीएचयू | फेसबुक : अमूमन कलेक्टर लोग बेवकूफ नही होते, चतुर होते हैं. मिर्जापुर का कलेक्टर परले दर्जे का रफ बेवकूफ है.

मिर्जापुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का बहुत संभ्रांत, बहुचर्चित और बहुआयामी जिला है. मिर्जापुर की कजरी अलग ही रस का स्वाद देती है. उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, स्वर्गीय गिरिजादेवी, यम राजन, चंदन तिवारी और हमारी प्रिय सरोज वर्मा जी सब ने किसी न किसी अवसर पर मिर्जापुर को गुलजार किया है.


इसी मिर्जापुर में सियासत का एक उखड़ा पुर्जा रहता है जनाब अरुण दुबे जी. जुल्म और जबरदस्ती के खिलाफ 40 साल से भी ज्यादा मुतवातिर लड़ रहे हैं. यह उनके जिले की दास्ताँ है.

इस मिर्जापुर का कलेक्टर एक पत्रकार को महज इसलिए ‘बुक’ कर दिया क्यों कि उसने सरकारी स्कूल में मिलनेवाले मिड डे मील की असलियत दिखा दी. बच्चे जस्ते की थाली में रोटी को नमक से खा रहे थे क्यों कि इन्हें यही परोसा गया था. कलेट्टर का कहना है- ‘यह सरकार का विरोध है.’ विरोध ? कलेट्टर सही समय पर क्लेट्टरी कर रहे हो, 77 के पहले मिलते तो बच्चू ! चौराहे पर कान पकड़ कर उठक बैठक करते.

किसी बुजुर्ग कलेट्टर से दरियाफ्त कर लो कलेटरी क्या होती है?

पत्रकार पर क्या धाराएं लगी हैं? सरकारी कामकाज में बाधा? कमबख्त ! हमारे पैसे पर, चांदी के प्लेट में मुर्ग मुसल्लम तुम खाओ और अबोध बच्चे रोटी और नमक खाएं? यह बता देना सरकारी कामकाज में रुकावट है? बहुत लड़ा है मिर्जापुर, अब सन्नाटा क्यों है? मन करता है उठा जाय फिर.

योगी जी! आप उस पत्रकार को रिहा करें और उसे शाबासी दें. आपके नियम और नीतियां दुरुस्त हों इसके लिए जरूरी है, वह पत्रकार बा इज्जत बरी किया जाय और कलेट्टर माफी मांगे.

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