कांग्रेस ने मांगा रिजिजू का इस्तीफा

नई दिल्ली | संवाददाता: कांग्रेस ने किरण रिजिजू का इस्तीफा मांगा है. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू का ऑडियो कथित टेप जारी किया है. कथित टेप के आधार पर कांग्रेस का दावा है कि इसमें नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिकल पावर कॉर्पोरेशन के सेंट्रल विजिलंस ऑफिसर रहे सतीश वर्मा और रिजिजू के कथित चचेरे भाई गोबोई रिजिजू के बीच की बातचीत है.

कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला का कहना है कि इस बातचीत को सुनने पर यह साबित होता है कि केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने अपने ठेकेदार भाई को फायदा पहुंचाने के लिये मंत्री पद का गलत इस्तेमाल किया. कांग्रेस ने यह दावा कर भी चौंका दिया कि इस टेप का अरुणाचल में सरकार को गिराने की कोशिशों से भी गहरा ताल्लुक है.


28 मिनट के इस ऑडियो टेप को जारी करते हुए कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिकल पावर कॉर्पोरेशन के एक हाइड्रो प्रॉजेक्ट में रिजिजू के कथित चचेरे भाई गोबोई रिजिजू सब-कॉन्ट्रैक्टर हैं, वह इस प्रॉजेक्ट के लिए कंकर-पत्थर सप्लाई करने का काम करते हैं.

सुरजेवाला के मुताबिक सेंट्रल विजिलंस ऑफिसर रहे सतीश वर्मा ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस प्रॉजेक्ट में 450 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र किया था. विजिलंस ऑफिसर ने अपनी रिपोर्ट में कई अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया था. रिपोर्ट में बताया गया था कि किस तरह फर्जी बिलों के सहारे पेमेंट लिए जा रहे थे, फर्जी नंबर के वाहनों से पत्थरों को ढाने का काम कागजों पर दिखाया जा रहा था. जिन ट्रकों का इस्तेमाल दिखाया गया था, जांच में उनके नंबर स्कूटर और बाइक के पाए गए. वहीं एक ट्रक को एक ही वक्त में अलग-अलग जगहों पर काम करते हुए भी दिखाया जा रहा था. जांच में यह भी पाया गया कि जो पत्थर 5km से लाये जा रहे थे, उनके लिए भाड़ा 80km के हिसाब से लिया जा रहा था. इन तमाम गड़बड़ियों के बावजूद ठेकेदार को पेमेंट दी जाती रही.

सुरजेवाला ने बताया कि सीवीसी ने इस साल जुलाई में अपनी रिपोर्ट सीबीआई और ऊर्जा मंत्रालय को भेज दी और तब जाकर पेमेंट रोकी गई. उनके मुताबिक, पेमेंट रोके जाने के बाद किरण रिजिजू के कथित चचेरे भाई गोबोई रिजिजू सेंट्रल विजिलंस ऑफिसर सतीश वर्मा से मिलने गये.

सुरजेवाला ने दावा किया कि यह ऑडियो टेप इसी मुलाकात का है जिससे यह साफ होता है कि गोबाई रिजिजू ने अपने भाई और केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू के नाम का इस्तेमाल करते हुए ऑफिसर पर दबाव बनाया, उन्हें प्रमोशन का लालच भी दिया गया. इस दौरान गोबोई ने यह भी माना कि वह अरुणाचल प्रदेश के कई प्रॉजेक्ट्स में कर रहे हैं.

हालांकि, किरण रिजिजू ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उनके पास कुछ पेंडिंग बिल क्लियर होने के लिए आये थे जिसे उन्होंने पीयूष गोयल को फॉरवर्ड कर दिया था. उन्होंने कहा कि उनका कोई भी भाई कॉन्ट्रैक्टर नहीं है.

कांग्रेस ने मांग की है कि 450 करोड़ के इस घोटाले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिये और जांच पूरी होने तक रिजिजू को उनके पद से हटा दिया जाना चाहिये.

उधर, खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर केन्द्रीय गृह राज्यमत्री किरण रिजिजू ने कड़ी नाराजगी जताई है. आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उनके ख़िलाफ़ झूठी ख़बरें लिखी जा रही हैं. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, “ऐसी ख़बरें प्लांट करने वाले अगर उनके यहां आयेंगे तो जूते खायेंगे.”

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