1930 की महामंदी जैसा संकट : IMF

नई दिल्ली | संवाददाता: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ ने कहा है कि कोरोना के कारण दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को इतना ज़्यादा नुक़सान हो रहा है कि इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में तीन फ़ीसदी की गिरावट आएगी.

आईएमएफ़ ने इसे ‘साल 1930 की महामंदी’ के बाद के दशकों की सबसे ख़राब वैश्विक गिरावट क़रार दिया है.


आईएमएफ़ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा, “कोरोना संकट अगले दो साल में विश्व की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का नौ खरब डॉलर बर्बाद कर देगा.”

हालांकि आईएमएफ़ ने दुनिया की अर्थव्यवस्था पर जारी किए गए अपने ताज़ा ‘वर्ल्ड इकॉनॉमिक आउटलुक’ में ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और अमरीका जैसे देशों में उठाए गए ‘त्वरित और ठोस उपायों’ की सराहना की है.

गीता गोपीनाथ ने मंगलवार को कहा कि ‘ऐतिहासिक लॉकडाउन’ ने कोरोना संकट की वजह से ‘गंभीर अनिश्चितता’ का सामना कर रही सरकारों के सामने एक ‘मनहूस सच्चाई’ लाकर रख दी है.

उन्होंने कहा कि साल 2021 में आंशिक भरपाई की संभावना जताई गई है. लेकिन जीडीपी की दर कोरोना से पहले वाले दौर से कम ही रहेगी. साथ ही हालात किस हद तक सुधर पाएंगे, इसे लेकर भी अनिश्चितता बरकरार रहेगी. मुमकिन है कि विकास के पैमाने पर बेहद ख़राब नतीजे आएं.

गीता गोपीनाथ ने कहा कि 1930 की आर्थिक महामंदी के बाद ऐसा पहली बार हो सकता है कि विकसित और विकासशील देश दोनों ही मंदी के चक्र में फंस जाएं.

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