छत्तीसगढ़ में अब हर दिन कोरोना 3 हज़ार पार

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में लगातार तीसरे दिन कोरोना के 3 हज़ार से अधिक मामले सामने आये हैं. राजधानी रायपुर में कोरोना के मामले 20 हज़ार को पार कर गये हैं. इसके अलावा मौत का आंकड़ा भी 500 को पार कर चुका है.

राज्य में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा 61,763 तक पहुंच गया है. इनमें से 27,978 लोग स्वस्थ हो चुके हैं. लेकिन 50 फीसदी से अधिक मरीज़ अभी भी बीमारी से जूझ रहे हैं. राज्य में अभी भी बीमारी से जूझ रहे मरीज़ों की संख्या 33,246 है.


शनिवार की रात 3120 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इनमें सर्वाधिक रायपुर जिले से हैं. इनमें रायपुर के 764 मरीज़ शामिल हैं.


रायपुर के अलावा दुर्ग 263, राजनांदगांव 273, बलौदाबाजार 39, सरगुजा 65, बिलासपुर 128, कबीरधाम 150, सुकमा 63, बीजापुर 56, धमतरी 91, जांजगीर-चांपा 150, बालोद 52, रायगढ़ 180, बस्तर 125, दंतेवाड़ा 22, महासमुंद 84, सूरजपुर 38, कोरिया 72, बलरामपुर 22, कांकेर 66, बेमेतरा 65, मुंगेली 106, गरियाबंद 73, जीपीएम 53, कोंडागांव 58, कोरबा 27 और जशपुर में 12 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं.

कोरोना पर रिसर्च करने वाले को NIA का सम्मन

बीबीसी के अनुसार भीमा कोरेगांव- एल्गार परिषद केस में एनआईए ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के असोसिएट प्रोफ़ेसर पार्थो सारथी रॉय को समन किया है. उन्हें एनआईए के सामने 10 सितंबर को हाज़िर होने को कहा गया था, लेकिन वे हाज़िर नहीं हो सके.

पार्थो सारथी वॉयरोलॉजी वैज्ञानिक (विषाणुओं पर शोध करने वाले) हैं. उन्होंने मॉलिक्यूलर बॉयोलॉजी में पीएचडी की है. वह उन वैज्ञानिकों में शमिल थे जो वुहान में कोरोना वायरस के केस सामने आने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ इस वायरस के बारे में शोध कर रहे थे.

बीबीसी से बात करते हुए पार्थो सारथी रॉय ने बताया, ”मुझे एनआईए की ओर से एक मेल मिला जिसमें कहा गया कि ऐसा लगता है कि एल्गार परिषद केस में जो कुछ हुआ आप उससे परिचित हैं और इसलिए आपको पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है.”

”मैंने जवाब दे दिया है कि मैं इस कोरोना महामारी से जुड़ी एक ट्रायल का हिस्सा हूं ऐसे में मैं अभी मुंबई नहीं आ सकता लेकिन मैंने ये कहा है कि वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के लिए मैं तैयार हूं. इसका मुझे कोई जवाब नहीं मिला है. ”

इस समन को लेकर 1000 से ज्यादा वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने एक बयान जारी करते हुए इसे सरकार की आलोचना करने वालों की आवाज़ दबाने की निरंतर कोशिश बताया है.

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