भ्रष्ट अफसर को 84 साल की जेल

रायपुर । संवाददाता: शिक्षकों का पैसा डकारने वाले भ्रष्ट सरकारी अधिकारी को छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने अभियुक्त को 84 साल कारावास की सजा सुनाई है. इस सरकारी अधिकारी ने शिक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर कर के उनके जीपीएफ से लाखों रुपये उड़ा लिये थे.

मामला बलौदा बाजार जिले का है. आरोप है कि 2003 में ब्लॉक एजुकेशन आफिसर के पद पर पदस्थ दुलारीराम कौशिक ने लेखापाल केजराम वर्मा और शिक्षा विभाग के कर्मचारी टीपी सोनी के साथ मिल कर कई शिक्षकों के जीपीएफ खाते से पैसे उड़ा लिये थे. तीनों आरोपी फर्जी कागजात बना कर और फर्जी हस्ताक्षर कर के शिक्षकों का पैसा खाते चले गये. इन भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों का कारनामा कई सालों तक चला.


जीपीएफ की रकम निकालने के दौरान जब शिक्षकों को पता चला तो उनके पैरों तले धरती खिसक गई. मामले में शिक्षकों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. बलौदाबाजार की पुलिस ने छह मामले दर्ज किये, जिनमें आरोप था कि शिक्षकों की रकम भ्रष्ट बीईओ दुलारीराम कौशिक और दूसरे लोगों ने डकार ली थी.

लगभग 14 साल तक चले इस मामले के दौरान दो आरोपियों लेखापाल केजराम वर्मा और शिक्षा विभाग के कर्मचारी टीपी सोनी की मौत हो गई. शुक्रवार को इस मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुये धारा 409, 420, 467, 468 व 471 के तहत कुल 84 साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई. हरेक मामले में कौशिक को 14-14 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई और सभी सजायें एक साथ चलेंगी.

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