लाखों जन-धन खाते बंद

रायपुर | संवाददाता: नोटबंदी के बाद से प्रधानमंत्री जनधन खाता योजना की हालत ख़राब है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक जन धन योजना में जमा रक़म का हवाला देते हुये दावा करते रहे हैं कि देश में बड़े पैमाने पर इन खातों में काला धन जमा किया गया है.

लेकिन प्रधानमंत्री के दावे से अलग जन-धन योजना का हाल ये है कि पिछले पखवाड़े भर में देश के 11 राज्यों में लाखों खाते बंद हो गये हैं. इसके अलावा ज़ीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या भी बढ़ गई है.


सबसे बुरा हाल छत्तीसगढ़ का है, जहां प्रधानमंत्री जन धन खाता योजना के तहत खोले गये 7 लाख 67 हज़ार से अधिक खाते बंद हो गये हैं. 30 नवंबर तक छत्तीसगढ़ में जन-धन खातों की संख्या 1,19,14,626 थी लेकिन 14 दिसंबर तक इनकी संख्या 1,11,46,986 रह गई.

छत्तीसगढ़ में इन 15 दिनों में जन-धन खातों में जमा 1842 करोड़ में से 271 करोड़ से अधिक की रक़म भी निकाल ली गई है. इस तरह औसत निकाला जाये तो हरेक जन-धन खाते में केवल 1409 रुपये बचे हैं.

जन-धन खातों में माओवादियों की रक़म जमा होने का दावा करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार भी इस बात का सही-सही जवाब देने की स्थिति में नहीं है कि खाते क्यों बंद हुये और रक़म कहां गई?

राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा कहते हैं-“अगर ऐसा हुआ है तो यह गंभीर बात है. मामले की पूरी जानकारी ली जाएगी कि आखिर गड़बड़ी कहां हुई है.”

तमिलनाडु में भी इन पंद्रह दिनों में 3,17,186 खाते बंद हुये हैं. इस दौरान कर्नाटक में 2,11,123 और केरल में 1,08,566 खाते बंद हुये हैं.

हालांकि कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां नये खाते खोले गये हैं. पूरे देश में नये खोले गये खातों की संख्या 19,35,134 है लेकिन ऐसे खातों के बाद ज़ीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या भी बढ़ गई है.

पूरे देश में जन-धन योजना के ज़ीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या 30 नवंबर तक 5,89,14,748 लेकिन इन अब ऐसे खातों की संख्या 6,03,28,417 जा पहुंची है, जिनमें फूटी कौड़ी तक नहीं है.

यहां तक कि गुजरात में भी ज़ीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या इन पंद्रह दिनों में 19,12,076 से बढ़ कर 20,56,595 हो गई है.

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