ट्रंप को पाकिस्तान से खतरा नहीं है!

जेके कर
अल कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को अपने देश में पनाह देने वाला पाकिस्तान डोनाल्ड ट्रंप को खतरनाक नहीं लगता है. हाल ही में उन्होंने सात मुस्लिम देशों इराक़, सीरिया, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सुडान और यमन से आने वालों पर 90 दिनों के लिये रोक लगा दी है. बड़े ताजुब्ब की बात है कि 11 सितंबर 2001 को अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करवाने वाले अल कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को अपने देश में छुपाकर रखने वाले पाकिस्तान से अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप को कोई खतरा नहीं महसूस हो रहा है.

11 सितंबर 2001 को अमरीका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हवाई जहाज को हाईजैक करवाकर हमला करवाने में ओसामा बिन लादेन की अहम भूमिका थी. दूसरे विश्व युद्ध के बाद शीत युद्ध के दौर में भी अमरीका को इतनी बड़ी चुनौती देने का किसी ने साहस नहीं किया था जो अल कायदा ने किया था. सोवियत संघ के टूटने के बाद अमरीका दुनिया का स्वंयभू दरोगा बन गया. जिसके दंभ को ओसामा बिन लादेन ने चूर-चूर कर दिया. अमरीका ही नहीं अल कायदा ने दुनिया के कई अन्य देशों में आतंकी वारदातें करके हजारों लोगों की जाने ली.


वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अल कायदा के हमले ने दुनिया के राजनीतिक नक्शे को बदलकर रख दिया. अमरीका ने आतंकवाद को अपना सबसे बड़ा दुश्मन घोषित करके उसके खिलाफ जंग छेड़ दी. अमरीका आतंकवाद के जंग के नाम पर आक्रमक हो गया. इसी बहाने उसने कई ऐसे राष्ट्राध्यक्षों को ठिकाने लगा दिये जो अमरीका के विदेश व्यापारिक नीति की राह में रोड़ा बने खड़े थे. इसी बहाने इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को साल 2003 में सत्ताच्युत करके वहां के राष्ट्रीकृत तेल के कुओं पर अमरीकी कंपनियों ने कब्जा कर लिया. लेकिन अंत तक ईराक से वे मानवजाति के लिये संहारक हथियार बरामद नहीं हुये जिनके लिये वहां हमला किया गया था.

आज भी पाकिस्तान में सेना की लॉबी जनता के द्वारा चुने गई सरकार से कई मायनों में ज्यादा भारी पड़ती है. सेना तथा आईएसआई मिलकर वहां कई ऐसे काम करती है जिससे वहां की चुनी गई सरकार इत्तेफाक नहीं रखती है. जिस तरह से पाकिस्तान में लाईन से आतंकवादियों को खुलेआम सरकारी संरक्षण दिया जाता है वह अपने आप में भविष्य के लिये आशंकाजनक संकेत लिये हुये है. यहां तक कि कई बार अमरीकी गुप्तचर एजेंसी सीआईए ने भी आशंका जाहिर की है कि कहीं पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर आतंकी समूह कब्जा न कर ले. यदि ऐसा होता है तो संपूर्ण मानवजाति के लिये खतरा उत्पन्न हो जायेगा.

इस तरह के विस्फोटक स्थिति से गुजरने वाले देश पाकिस्तान से अमरीका में कोई आतंकी क्यों नहीं घुस सकता है? क्या पाकिस्तान की आतंकियों को शरण देने की नीति से अमरीकी जनता को कोई खतरा नहीं है?

असल में देखा जाये तो अमरीका ने जिन सात मुस्लिम देशों पर रोक लगाई है, पाकिस्तान अकेला ही उन सबसे खतरनाक है. आखिर, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षकर करने के पहले एक बार अमरीका के इतिहास को पढ़ लिया होता तो वे जरूर पाकिस्तान का नाम इसमें शामिल करते. ओसामा को पनाह देने वाला पाकिस्तान अमरीका के नये राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खतरनाक नहीं लगता है जिसके लिये उनके पिछले राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जीन जान लगा दिया था. क्या इसे अमरीकी विदेश नीति में भारी उलट-फेर माना जाये?

(हम ट्रंप द्वारा सात देशों पर लगाये गये रोक का समर्थन नहीं करते हैं. हमने पाक संबंधी अमरीकी विदेश नीति पर सवाल उठाये हैं.)

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