छात्रों का शिक्षा बजट

राजीक हुसैन
केंद्र सरकार ने शिक्षा बजट में करीब दस फीसदी की बढ़ोतरी की है. जो पिछली बार महज पांच फीसदी बढ़ा था. वित्त मंत्री अरुण जेटली नें बजट में ऐलान करके इस दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं. शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शैक्षणिक रुप से 3479 ब्लॉकों के स्कूलों के इनोवेशन फंड का ऐलान किया गया हैं. इसमें स्थानीय स्तर पर इनोवेशन तथा सूचना प्रौधौगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा. उद्देश्य है सीखने समझने और खुद प्रयोग करने की प्रवृत्ति छात्रों में स्कूलों से ही विकसित हो. इसमें कोई संदेह नही की इन प्रयासों को सही समय पर शिक्षा क्षेत्र में प्रयोग किया जाए तो सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं.

लेकिन इस लक्ष्य को पाने में बहुत बड़ी भूमिका सरकारी स्कूलों में पोशाक, साइकिल, छात्रवृत्ति तथा अन्य सहायता राशि के रुप में दी जाने वाले सुविधाओं के बजट का भी है. जिससे प्रत्येक छात्र को आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलता है. पर अफसोस है कि आज देश के कई सरकारी स्कूलों में छात्रो को इन योजनाओं का लाभ समय पर नही मिल पा रहा है. कारणश गरीब छात्रों को खासी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है. कुछ ऐसी ही समस्याओं का सामना कर रहे हैं बिहार के जिला सीतामढ़ी के बाजपट्टी प्रखंड के मदारीपुर में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्धालय और पुपरी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्धालय के कई छात्र. जिन्हे लंबे समय से छात्रवृत्ति तथा अन्य योजनाओं की राशि नही मिली है.


इस संबध में नौवीं कक्षा की छात्रा मधु कुमारी बताती है “दो साल से मुझे छात्रवृत्ति नही मिल रही है” हर बार यही सुनते हैं कि अब आएगा, अब आएगा लेकिन आता नही है. 7वीं की करिश्मा ने बताया “जब भी मैडम से पुस्तक के पैसे के बारे पूछते हैं तो कहती हैं कि मिल जायेगा”. कक्षा 6 के पंकज कुमार ने कहा “पोशाक का 700 और छात्रवृत्ति 1200 मिलता है. लेकिन हमलोग को आधा पैसा ही दिया जाता है मैडम से पूछते हैं कि बाकी पैसा कब मिलेगा तो कुछ ठीक-ठीक नही बताती”.

छात्रवृत्ति न मिलने के कारण बच्चों के अभिभावक भी चिंता में हैं. विधवा नसीमा खातुन ने कहा “मेरी बेटी जन्नती फिरदौस कक्षा 7 में पढ़ती हैं. गरीब हूँ विधवा हूँ किसी तरह पेट पाल रही हूँ. सोचा था आजकल स्कूल में तो हर चीज के लिए पैसा मिल जाता है तो बेटी पढ़ लिख कर किसी लायक बन जाएगी लेकिन शुरु- शुरु में पैसा मिला अब बहुत दिनों से नही मिला है क्या करें”.

चमकिला खातुन के अनुसार “अल्पसंख्यक कलयाण विभाग द्वारा आंवटित राशि की सूची में मेरी बेटी शमां प्रवीन का नाम है लेकिन स्कूल वाले कहते हैं कि पैसा अबतक नही आया”. अभिभावक लक्ष्मण महतो, इशरत खातुन, मौहम्मद सुल्तान, यासमीन खातुन इत्यादि ने बताया कि आंवटित राशि की सूची में उनके बच्चों का नाम है लेकिन किसी को पोशाक राशि नही मिली, किसी को साइकिल राशि, तो किसी को उसकी छात्रवृत्ति.

जबकि स्कूल प्रबंधन बता रहें हैं कि “बहुत सारे बच्चें नियमित रुप से स्कूल नही आते इस कारण फॉर्म नही भरा पाता. और इन योजनाओं का लाभ नही ले पातें”.

इस विषय पर जिला सीतामढ़ी के गांव भूतहा के भूतहा मध्य विधालय के शिक्षक कमाल अजहर कहते हैं ” आज अधिकतर स्कूलों में पढ़ाई अच्छी न होने के कारण छात्र या तो स्कूल जाना छोड़ देते हैं या फिर घर में ही रहकर पढ़ाई करना पसंद कते हैं. ऐसे में कई बार कुशल छात्र भी फॉर्म भरने से वंचित रह जाते है. और प्रत्येक सत्र में सराकार द्वार उपल्बध कराए जाने वाली राशि स्कूल तक इतनी देर में पहुंतची है कि छात्र उसका पूरा लाभ नही ले पातें. इसलिए आवश्यक है कि सत्र के अनुसार राशि समय पर प्रत्येक स्कूलों में पहुंचे ताकि छात्रो को नियमित रुप से सहायाता मिलती रहे”.

स्पष्ट है केंद्र से लेकर राज्य सरकार के पास शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए योजनाओं और बजट की कमी नही है परंतु जब तक समय प्रबंधन को इन योजनाओं से नही जोड़ा जाएगा तब तक “सब पढ़े सब बढ़े” का नारा, नारा ही रह जाएगा.
(चरखा फीचर्स)

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