नक्सली बता कर हत्या करने वाले डीएसपी को जेल

रांची | संवाददाता: नक्सली बता कर हत्या करने के मामले में एक डीएसपी समेत चार पुलिसकर्मियों को 5-5 साल की सजा सुनाई गई है. सजा के बतौर चारों को एक-एक लाख का जुर्माना और पीड़ित परिवार को दस लाख का मुआवजा देने के भी निर्देश अदालत ने दिये हैं.

चार में से तीन पुलिसकर्मी सेवानिवृत हो चुके हैं. जबकि चौंथा आरोपी अभी सेवारत है. इस मामले की सीबीआई ने जांच की थी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया था.


आरोप है कि जुलाई 1998 में पलामू जिले के पांकी थाना के सिरम गांव से पुलिस ने पारसनाथ सिंह को पुलिस ने घर से गिरफ्तार किया था. पांकी इलाका किसी जमाने में नक्सली संगठन पार्टी युनिटी का गढ़ रहा है और नक्सली नेता मधु सिंह को इसी इलाके से विधायक चुना गया था. आरोप है कि पारसनाथ सिंह को पुलिस हिरासत में छाती पर बांस और बल्ली रख कर इतना पीटा गया कि उनकी मौत हो गई.

मृतक की पत्नी अहुलास देवी ने इस मामले में हाइकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद जस्टिस एमवाई इकबाल की बेंच ने इस मामले की जांच सीबीआई से आदेश दिया था. 2001 में मामले की सीबीआई जांच शुरु हुई और और तीन साल बाद 2004 में सीबीआई ने तत्कालीन डीएसपी दीनानाथ रजक, इंस्पेक्टर देवलाल प्रसाद, थाना प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद और सब इंस्पेक्टर रुख्सार अहमद के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की.

इस मामले की सुनवाई करते हुये सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एके मिश्रा ने चारों को दोषी पाया और उन्हें पांच-पांच साल की सजा सुनाई है. इन पुलिसकर्मियों में से डीएसपी दीनानाथ रजक, इंस्पेक्टर देवलाल प्रसाद और पांकी थाना प्रभारी सुरेंद्र प्रसाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं. जबकि सब-इंस्पेक्टर रुख्सार अहमद अभी सेवारत हैं.

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