छत्तीसगढ़ में कर्ज़ के लिये भटक रहे किसान

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में कर्ज़ माफ़ी की सरकार की घोषणा के बाद भी किसान नये कर्ज़ के लिये भटक रहे हैं. किसान बीज-खाद के लिये दर-दर भटक रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. हालत ये है कि सहकारी बैंकों से ऋण माफ़ी का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी किसानों को नया कर्ज़ा नहीं दिया जा रहा है.

एक तरफ़ तो सरकार को कर्ज़ माफ़ी की घोषणा के सात महीने बाद सहकारी बैंकों के ऋणी किसानों को उनका प्रमाण पत्र बांटने का ध्यान आया और अब कहीं जा कर प्रमाण पत्र बांटने का अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर जिन किसानों को सहकारी बैंकों से प्रमाण पत्र मिल चुका है, उन्हें भी खाद बीज नहीं दिया जा रहा है.


राज्य के 21 नेशनलाइज्ड बैंक के किसानों को तो बैंकों ने कर्ज़ देने से साफ़ मना कर ही दिया है, हालत ये है कि सहकारी बैंकों में जिन किसानों को कर्ज़ माफ़ी का प्रमाण पत्र दिया जा चुका है, उन्हें भी कर्ज़ देने से मना किया जा रहा है.

पिछले पखवाड़े राजिम के कृषि उपज मंडी में ऋण माफ़ी तिहार के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे किसानों ने कांग्रेस विधायक अमितेश शुक्ला को अपना दुखड़ा सुनाया. हालत ये थी कि ज़िले में कितने किसानों का ऋण माफ़ किया गया है, यह जानकारी भी विधायक अमितेश शुक्ला को उपलब्ध नहीं कराई गई थी.

मंच पर विधायक भाषण देने पहुंचे तो सोरिद गांव के किसानों ने बीच में ही अपनी परेशानी बतानी शुरु कर दी. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक खंडमा की सोरिद सोसायटी के किसानों के कहना था कि ऋण माफ़ी का प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी उन्हें खाद-बीज के लिये नया कर्ज़ नहीं दिया जा रहा है.

किसानों की समस्या सुनने के बाद विधायक अमितेश शुक्ला नाराज़ हुये और उन्होंने नोडल अधिकारी धनराज पुरबिया को मंच पर बुला कर उन्हें चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि गरीब किसानों के साथ अन्याय मत करो.

छत्तीसगढ़ में ऋण माफ़ी का बुरा हाल

छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले साल दिसंबर में सहकारी बैंकों से कर्ज़ लेने वाले 13.46 लाख किसानों के 5260.15 करोड़ रुपये माफ़ करने की घोषणा की थी.

इसके अलावा छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक से कर्ज़ लेने वाले 1.79 लाख किसानों का 1208.33 करोड़ माफ करने का दावा किया गया. लेकिन आंकड़ों के अनुसार किसानों के खाते में केवल 701.11 करोड़ की रकम ही पहुंची और सरकार ने शेष बची रकम बैंकों को दी ही नहीं.

इसी तरह सार्वजनिक क्षेत्र के 21 व्यावसायिक बैंकों से कर्ज लेने वाले 2.72 लाख किसानों के 2441.25 करोड़ रुपये कर्ज़ माफ़ करने का दावा किया गया था लेकिन इन किसानों के खाते में 15 जून तक तो सरकार ने फूटी कौड़ी नहीं जमा की.

बाद में सरकार ने बैंकों को केवल 899.21 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया और 1542.04 करोड़ की रकम बैंकों को दी ही नहीं.

संकट ये हुआ कि छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र के व्यावसायिक बैंकों ने सरकार से मिली हुई आधी-अधूरी रकम को समानुपातिक रुप से किसानों के खाते में जमा कर दिया. यानी किसानों के खाते में भी आधी-अधूरी रकम ही जमा की गई और किसान बैंक के कर्ज़दार बने रह गये.

क्या कह रहे हैं बैंक

बैंक अधिकारियों का कहना है कि किसान क्रेडिट कॉर्ड से अल्पकालीन कृषि ऋण लेने वाले किसी भी किसान के खाते में अगर ब्याज़ समेत पूरी रकम जब तक जमा नहीं की जाती है, तब तक कोई नया कर्जा उस किसान को नहीं दिया जा सकता.

इन किसानों को किसी दूसरे बैंक से भी कर्ज नहीं दिया जा सकता.

यही कारण है कि राज्य भर में बड़ी संख्या में किसान सरकारी दावे के फेर में फंस कर कर्ज के लिये भटक रहे हैं.

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