मंत्रालय में धूल खा रही हैं वन विभाग की फाइलें

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में वन विभाग की ज़रुरी फाइलों से धूल हटने का नाम नहीं ले रही है.कई ज़रुरी फ़ैसलों के बाद भी उन पर अमल नहीं हो पा रहा है क्योंकि इन फाइलों पर कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है.

एक के बाद एक लगातार तबादलों की फ़ाइलों पर रातों-रात फ़ैसले हो रहे हैं. लेकिन तबादलों से इतर फ़ैसलों पर कोई बात तक नहीं कर रहा है. फाइलों की रफ़्तार कछुये जैसी हो गई है. कई मुद्दों पर तो दो-दो साल से फाइलें मंत्रालय में अटकी हुई हैं.


हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा घायलों के प्रकरण में तात्कालिक सहायता राशि प्रदान किए जाने की फाइल, सचिव वन विभाग, पत्र क्रमांक 851, 6 फरवरी 2019 से मंत्रालय में अटकी पड़ी है. दो साल में भी इस फ़ाइल पर कोई फ़ैसला नहीं हो सका.

वन्यप्राणियों द्वारा मकान क्षति और फसल क्षति की मुआवज़ा राशि बढ़ाये जाने के प्रस्ताव की फाइल सचिव वन विभाग, पत्र क्रमांक 106, 4 जनवरी 2019 से मंत्रालय में ही फंसी हुई है. इस फ़ाइल पर भी दो साल में कोई फ़ैसला नहीं हो सका.

अचानकमार टाइगर रिजर्व और उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व में बाघों के संरक्षण व संवर्धन हेतु बाघ क्षेत्रों एवं बाघ विचरण क्षेत्रों को जोड़ने वाले स्थलों की पहचान करने के साथ साथ बाघों की संख्या में वृद्धि करने के लिये भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से सहयोग प्राप्त करने का फ़ैसला लिया गया था. इस फ़ैसले पर अनुमति प्रदान करने की फाइल क्रमांक 5243, 27 जनवरी 2020 को भेजी गई थी. लेकिन मंत्रालय में ही यह फाइल पिछले साल भर से अटकी हुई है.

गौर को लेकर तैयार मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी पर स्वीकृति प्रदान करने की फाइल सचिव, वन विभाग, पत्र क्रमांक 1199, 3 मार्च 2020 से मंत्रालय स्तर पर लंबित है.

इसी तरह तेंदुए को लेकर तैयार मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी की फाइल क्रमांक 415, 27 जनवरी 2020 से मंत्रालय में लंबित है.

भालू को लेकर तैयार मानक संचालन प्रक्रिया इस साल भेजी गई थी. इसे संशोधित कर प्रस्ताव भेजने की बात कही गई थी. लेकिन क्या संशोधन किया जाना है, यही दुविधा बनी रही. हालत ये है कि यह फाइल सचिव, वन विभाग, पत्र क्रमांक 549, 1 फरवरी 2020 से यह लंबित है.

राज्य के चिड़ियाघरों, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में टिकट के तौर पर वसूल की जाने वाली रकम से विकास कार्यों की स्वीकृति के लिये राज्य स्तरीय समन्वय समिति के पुनर्गठन का प्रस्ताव सचिव, वन विभाग पत्र क्रमांक 119, 7 जनवरी 2020 को भेजी गई थी. लेकिन मंत्रालय में बैठे अधिकारियों को इस पत्र का जवाब देने की फुर्सत नहीं मिल पाई. मामला मंत्रालय स्तर पर लंबित पड़ा हुआ है.

वन विभाग में पशु चिकित्सकों के स्थाई पदों के सृजन के लिये प्रमुख सचिव, वन विभाग का यू ओ नंबर 902, 2 मई 2020 से मंत्रालय में लंबित है.

29 मई 2020 को ही पत्र क्रमांक 2044 प्रमुख सचिव, वन विभाग की फाइल मंत्रालय में अटकी हुई है. प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी का यह प्रस्ताव वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 38 यू के अंतर्गत राज्य में बाघों के संरक्षण के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया गया था.

राज्य के वन्यप्राणी प्रभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के सेटअप की स्वीकृति से संबंधित प्रस्ताव प्रमुख सचिव वन विभाग एवं प्रधान मुख् वन संरक्षक के यूओ क्रमांक 392, 864 को 28 अप्रैल 2020 को प्रेषित किया गया था. लेकिन यह फाइल भी मंत्रालय में लंबित है.

नवंबर 2019 में वाइल्ड लाइफ़ बोर्ड में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्य में शिकार और वन्य अपराधों को रोकने के लिये एसटीएफ के गठन का फ़ैसला किया गया था. इससे संबंधित यू ओ क्रमांक 494, दिनांक 30 मई 2020 और वन्यप्राणी 41/2697 16 जुलाई 2020 को भेजा गया था. लेकिन यह फाइल भी मंत्रालय में पड़ी हुई है.

वन्यप्राणी संरक्षण के लिए क्षेत्रीय संरचना का पुनर्निधारण के लिये सचिव, वन विभाग का पत्र क्रमांक 4424, दिनांक 3 जुलाई 2020 और पत्र क्रमांक 2979, 18 अगस्त 2020 से मंत्रालय स्तर पर लंबित है.

बिलासपुर के कानन पेंडारी जू का प्रबंधन संचालक अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फियर रिज़र्व के हस्तांतरित करने हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा पत्र क्रमांक 2782 को 6 अगस्त 2020 को भेजा गया था. लेकिन इस पर फ़ैसला नहीं हुआ और यह फ़ाइल भी मंत्रालय में लंबित है.

जंगली हाथियों को बेहोश करने हेतु आवश्यक निश्चेतना दवाओं की क्रय अनुमति की फाइल पत्र क्रमांक 3595, 20 अक्टूबर 2020 से मंत्रालय स्तर पर लंबित है.

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