यथार्थ में गांधी

कनक तिवारी | फेसबुक : यथार्थ में गांधीजी तो खैर अब आ ही नहीं पाएंगे .उन्हें तो 30 जनवरी 1948 को खामोश कर दिया गया था. लेकिन सपने में ख्यालों में आते रहते हैं. और 150 बरस के होने पर 2 अक्टूबर को पूरे देश में लाए जाएंगे पकड़कर सरकारों के द्वारा. और खूब सभाएं होंगी. कार्यक्रम होंगे. प्रधानमंत्री से लेकर उप मंत्री तक विधायक तक मंच पर नेताओं की बहार होगी.

जिन्होंने गांधी को कभी नहीं पढ़ा है, जिन्हें गांधी पर भरोसा नहीं है, जिनके घर में गांधी की किताब भी नहीं होगी, तस्वीर भी शायद नहीं होगी, सरकारी दफ्तरों में जबरिया तस्वीर लटकी है. वह बात अलग है. वह भी कई जगह बहुत कुरुचि पूर्ण है. उसमें गांधी ठीक-ठाक नहीं दिखाई देते. वह गांधीजी के बारे में रटे रटाए वाक्य कहेंगे, जो स्कूल के बच्चे कहते हैं.


इतना ही उनको आता है. तभी तो वह नेता बनते हैं. चुनाव जीतते हैं .लेकिन ये नेता सब मिलकर सभी पार्टियों के सभी सरकारों में घुसकर गांधी की 21वीं सदी को तबाह कर रहे हैं. गांधी शरीर नहीं थे. बहता हुआ विचार हैं. वह आज भी कहीं समय के आयाम में हैं. इतिहास के आयाम में हैं.

बेरोजगारी है. नौकरी नहीं है. पर्यावरण को बर्बाद किया जा रहा है. सड़कों पर महिलाओं का बलात्कार हो रहा है. पुलिस वाले मूंछ पर ताव देकर गरीबों से चौथ वसूल कर रहे हैं. नेताओं की खुशामद कर रहे हैं. देश में बिना घोषणा के आपातकाल जहां चाहे वहां लगा दिया जाता है. हिंदू मुस्लिम को इस तरह लड़ाया जा रहा है. मानो दो ऐसी कौमें है जिनमें एक का जिंदा रहना जरूरी है. दूसरे का नहीं.

आजादी की लड़ाई के सारे खलनायक देश के बड़े नेता बन रहे हैं. भारतरत्न की सीढ़ी तक पहुंच गए हैं. जो असली नेता थे. उनको दफ्न किया जा रहा है. उनके नाम से परहेज किया जा रहा है. विद्या के पारंगत बन गए हैं. बहुत बड़े सफेद झूठ को गांधी के सत्य के मुकाबले जीतने का मौका दिया जा रहा है. काहे की गांधी की अहिंसा, अब तो मॉब लिंचिंग की हिंसा के जरिए गांधी को समझाया जा रहा है.

यह सब गांधी को बताते क्यों नहीं हम लोग. बता दें तो वह वापस लौट जाएंगे. आना नहीं चाहेंगे. आदिवासी और दलित तो गैर कांग्रेसी नहीं कांग्रेसी राज्यों में भी लूटे जा रहे हैं. फिर भी गांधी 2 अक्टूबर को आकर माला पहनेंगे.

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