जॉर्ज फ़र्नान्डिस जैसे नेता

चंचल | फेसबुक: 3 जून जॉर्ज फ़र्नान्डिस का जन्मदिन है. परिस्थिति जिसे नौकरशाही ने गढ़ कर जॉर्ज को कांग्रेस के प्रति इतना कटु और जिद्दी बना दिया था कि अपने आखिरी दिनों में वे साम्प्रदायिक ताकतों के सहयोग में खड़े हो गए.

गौर से देखा जाय तो श्रीमती गांधी बनाम जॉर्ज दो अलग अलग जिद की दास्तान है. 74 में रेल हड़ताल ने श्रीमती इंदिरा गांधी के अहम को इस कदर घायल किया कि कभी जार्ज के प्रति निष्पक्ष नही हो सकी. यहां नौकशाही ने भरपूर खेल खेला. आपातकाल के दौरान जार्ज और उनके परिवार के साथ जो कुछ भी हुआ वह वाकई अति था.


जनता सरकार के जमाने मे यह अति टूटा. एक दिन जार्ज से हमने यूं ही पूछा- कभी आपकी मुलाकात मैडम गांधी से हुई ? हाँ हुई न. एक दिन हम पार्लियामेंट एनेक्सी की लिफ्ट में घुसा इतने में मैडम भी आ गयी.

मैडम ने केवल एक बात कही, कैसे हो ? हमने कहा ठीक है. बस.

मोहनी गिरी पूर्व राष्ट्रपति वी वी गिरी की पुत्री ने चिकमगलूर चुनाव का वाकया लिखा है. जॉर्ज के बारे में श्रीमती गांधी को यह खबर मिली थी कि जार्ज बहुत अच्छे वक्ता हैं. मोहिनी जी श्रीमती गांधी के साथ थी और चुनाव संचालन कर रही थी.।श्रीमती गांधी ने मोहिनी जी से कहा हमे जॉर्ज का भाषण सुनना है. मोहनी जी ने इंतजाम किया.

जहां जार्ज का भाषण होना था, उसके पीछे एक मकान में श्रीमती गांधी ने बैठ कर पूरा भाषण सुना और आखिर में मोहिनी जी कहा था- हमारी पार्टी में ऐसे नेता क्यों नही हैं ?

कालांतर में यही बात मरहूम राजीव गांधी ने जार्ज के बारे बोला कि हमारी पार्टी में जार्ज की तरह नेता क्यों नही है. वी पी सिंह सरकार के जमाने मे एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल कश्मीर गया था.

उसमें देवीलाल, राजीव गांधी, जार्ज वगैरह कई लोग थे. जगमोहन गवर्नर थे. थोड़ी देर बाद पता चला। जार्ज गायब हैं. सिक्योरिटी वालों ने बताया जार्ज साहब अकेले ही पैदल शहर की तरफ निकल गए हैं.

दो घंटे बाद जार्ज वापस आये तो पता चला चरमपंथियों के बीच थे बात चीत करके लौटे. उग्रवादियों ने जार्ज से कहा – बाकी लोग भी हमसे आपकी तरह क्यों नही मिलते ?

उस समय राजीव जी ने यही कहा था- जॉर्ज की तरह हमारी पार्टी में कोई नेता क्यों नही है.

सल्यूट कामरेड जॉर्ज.

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