गुजरात में कांग्रेस 113 भाजपा 65- सीएसडीएस एबीपी

नई दिल्ली | संवाददाता: गुजरात चुनाव में कांग्रेस सत्तारुढ़ भाजपा से आगे निकल सकती है. सीएसडीएस और एबीपी के सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है. सीएसडीएस के योगेंद्र यादव के अनुसार अभी तक का जो आंकलन है, उसके अनुसार भाजपा को 83 सीटें मिल सकती हैं और कांग्रेस पार्टी को 95 सीटें मिल सकती हैं.

182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा में अभी भाजपा के 115 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी को 61 सीटों पर संतो। करना पड़ा है. ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस यहां भारी है और 2012 के चुनाव में उनके 49 विधायक चुने गये, जबकि इन्हीं इलाकों में भारतीय जनता पार्टी के 44 उम्मीदवार जीत कर आये थे.


2012 के चुनाव को देखें तो अर्ध शहरी इलाकों में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को तगड़ी पटखनी दी थी और यहां भाजपा को 36 सीटें मिली थीं और कांग्रेस को 8 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. शहरी इलाकों में भी भाजपा को 35 सीटें मिलीं और कांग्रेस को 4 सीटें मिली थीं. लेकिन सीएसडीएस ने 2017 के चुनाव को लेकर जो आंकलन किया है, उसमें परिस्थितियां बदली हुई नजर आती है.

2017 के गुजरात चुनाव को लेकर सीएसडीएस-एबीपी ने दो संभावनाएं जताई हैं. इसके अनुसार सीएसडीएस-एबीपी पोल के अनुसार वोट शेयर अगर दोनों पार्टियों का 43-43 प्रतिशत रहता है तो भाजपा को 83 सीटें मिलेंगी, जबकि कांग्रेस पार्टी को 95 सीटें मिल सकती हैं. इनमें ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस को 66 और भाजपा को 28, अर्ध शहरी इलाकों में भाजपा को 26, कांग्रेस को 19 और शहरी इलाकों में भाजपा को 29 व कांग्रेस को 10 सीटें मिलेंगी.

दूसरी संभावना के तहत सीएसडीएस-एबीपी सर्वे में गुजरात चुनाव में भाजपा को केवल 65 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी को 113 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. इस संभावना के तहत अगर 2 प्रतिशत वोटों में बदलाव होता है और कांग्रेस को 45 प्रतिशत व भाजपा को 41 प्रतिशत वोट मिलते हैं तो ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस 74 व भाजपा 20, अर्ध शहरी इलाकों में कांग्रेस 27 व भाजपा 18 और शहरी इलाकों में कांग्रेस 12 व भाजपा को 27 सीटें मिल सकती हैं.

हालांकि ये संभावनायें भर ही हैं और मतदाता के मन की थाह लगा पाना आसान नहीं है. दूसरा एक बड़ा वर्ग यह मान कर चल रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से अपनी ताकत गुजरात में झोंकी है, उसकी अनदेखी इस सर्वे में की गई है. जाहिर है, असली फैसला तो मतगणना के समय सामने आयेगा.

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