‘मोदी बेटर ब्रांड नेम है’

अन्वेषा गुप्ता
हरियाणा के मंत्री का दावा है कि मोदी बेटर ब्रांड नेम है. खादी ग्रामोद्योग के कैलेंडर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का फोटो हटाकर प्रधानमंत्री मोदी जी का फोटो लगाने से उत्पन्न हुये विवाद पर हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बयान दिया कि मोदी ज्यादा बेटर ब्रांड नेम है, मोदी की फोटो लगने से खादी की सेल 14 फीसदी बढ़ी है. अनिल विज ने अंबाला में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “गांधीजी ने कोई खादी का ट्रेडमार्क तो करा नहीं रखा है. पहले भी कई बार उनकी तस्वीर नहीं लगी है.”

Modi bigger brand than Mahatma; Gandhi will be removed from notes also:Haryana Min Anil Vij


हालांकि, इसका विरोध होने पर उन्होंने ट्वीट करके अपना बयान वापस ले लिया है.

 

इस बीच सबसे गौर करने वाली बात है कि भाजपा सरकार के मंत्री का मानना है कि मोदी जी एक बेहतर ब्रांड नेम हैं जिससे बिक्री बढ़ती है. इससे जुड़ा हुआ सवाल है क्या इसीलिये paytm तथा Reliance jio ने अपने विज्ञापन में प्रधानमंत्री मोदी जी की तस्वीर का उपयोग किया था? जहां तक हमारी समझ में आता है, वह है कि ब्रांड नेम बाजार में बिकने वाले उत्पाद की होती है. जबकि मोदी जी को देश की जनता ने स्पष्ट बहुमत के साथ ‘अच्छे दिन’ आने की आशा के साथ देश का प्रधानमंत्री बनाया है.

उनकी तुलना एक बेटर ब्रांड नेम के रूप में करना देश के जनता द्वारा दिये गये निर्णय का अपमान करना है. देश की जनता का अपमान करना है.

एक ही सिक्के के कई पहलू होते हैं. अर्थात् हर चीज को अलग-अलग कोणों से, अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है. ठीक उसी तरह से एक राजनेता को कई दृष्टिकोण से देखा जा सकता है. मसलन, दुनिया के कई राजनीतिज्ञों के लिये सोवियत रूस के राष्ट्रपति स्टालिन एक तानाशाह थे परन्तु सोवियत जनता के लिये वे एक ऐसे राजनीतिक अर्थशास्त्र के ज्ञाता तथा प्रशासक थे जिन्होंने वस्तुओं की कीमत साल 1956 तक वहीं रोककर रखी जहां पर वह साल 1930 में थी.

क्यूबा के नेता फिदेल कास्त्रो को अमरीका हमेशा से अपनी आंख की किरकिरी मानता रहा है परन्तु उन्होंने जनता को समानता का अधिकार दिलाया तथा बतिस्ता के तानाशाही से मुक्ति दिलाई थी. मार्टिन लूथर किंग ने कालों को बराबरी का अधिकार दिलाने के लिये संघर्ष किया था पर वे गोरों के फूटी आंख भी नहीं सुहाते थे.

हां, यह हो सकता है कि मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कुछ उद्योगपतियों के सितारें गर्दिश से निकलकर आसमान पर चमकने लगे हों परन्तु उनकी तुलना एक बेटर ब्रांड नेम के रूप में करना देश की उस जनता का अपमान करना है जिसने उन्हें प्रधानमंत्री बनाया है.

यहां पर यह सवाल भी किया जाना चाहिये कि हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री के लिये मोदी चुनाव जिताने वाला ब्रांड नेम तो नहीं है. जिसके लहर के चलते भाजपा को साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इतनी सीटें मिली जितनी कभी अटल बिहारी बाजपेयी जी भी नहीं दिला सके थे?

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