हैदराबाद मुठभेड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने बनाया जांच आयोग

नई दिल्ली | डेस्क: हैदराबाद मुठभेड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई में कई सवाल उठे. सरकार की ओर से पक्ष रख रहे मुकुल रोहतगी से सुप्रीम कोर्ट ने कई सवाल पूछे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व न्यायाधीश वीएस सिरपिरकर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग बनाने का आदेश दिया.

इस जांच आयोग में बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रेखा बलडोटा और सीबीआई के पूर्व निदेशक डीआर कार्तिकेयन को सदस्य बनाया गया है. कार्तिकेयन तमिलनाडु बैच के अधिकारी रहे हैं.


एबीपी के अनुसार बलात्कार के आरोपियों की कथित मुठभेड़ में मारे जाने की घटना में मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई. उन्होंने दावा किया कि आरोपियों के हमले में दो पुलिस वाले घायल भी हुये.

इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मुकुल रोहतगी से कई सवाल पूछे. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोवड़े ने तेलंगाना पुलिस से पूछा कि क्या आरोपी हिस्ट्रीशीटर थे. इस पर तेलंगाना पुलिस की ओर से दलील रख रहे वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि नहीं वो लॉरी ड्राइवर और क्लिनर थे. जब पुलिस आरोपियों को इलाके की पहचान के लिए ले जाना चाहती थी, तो थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए. सैकड़ों की भीड़ थी. इसलिए हम उन्हें रात में क्राइम सीन पर ले गए.

हैदराबाद मुठभेड़ को लेकर मुकाल रोहतगी ने कहा कि आरोपियों को हथकड़ी नहीं लगाई गई थी. उन्होंने पुलिस कर्मियों की पिस्तौल छीन ली. पुलिस पर पत्थर फेंके.

वकील मुकुल रोहतगी- आरोपियों ने पुलिस की पिस्टल छीन कर फायर किया. तब पुलिस को गोली चलानी पड़ी.

मुख्य न्यायाधीश- कोई पुलिस वाला घायल नहीं हुआ?

मुकुल रोहतगी- 2 हुए.

मुख्य न्यायाधीश- गोली से?

मुकुल रोहतगी- नहीं पत्थर से. हर आरोपी के पास पिस्टल नहीं थी.

मुख्य न्यायाधीश – हमारा मत है कि आप जांच होने दीजिए. वहां सारी बातें आप रख सकते हैं.

मुकुल रोहतगी- PUCL केस में फैसला था कि दूसरे थाने की टीम जांच करेगी. एनकाउंटर टीम के अफसर से ऊंचे रैंक का अफसर जांच टीम का अध्यक्ष होगा. हमने इस आधार पर SIT बनाई है.

मुख्य न्यायाधीश- हेड कौन है?

मुकुल रोहतगी- कमिश्नर रैंक के अधिकारी.

मुख्य न्यायाधीश- क्या आप उनपर मुकदमा चलाएंगे. अगर हां तो हमारे आदेश देने जैसा कुछ नहीं है. अगर आप उनको निर्दोष मानते हैं, मुकदमा नहीं चलाएंगे तो फिर हमें जांच से मत रोकिए. लोगों को सच जानने का हक है.

मुकुल रोहतगी- हम चीजें कोर्ट में रखेंगे. जज तय करेगा.

मुख्य न्यायाधीश- मतलब आप अपनी तरफ से मांग नहीं करेंगे.

वकील रोहतगी- पुलिस की FIR के हिसाब से आत्मरक्षा में गोली चलाई.

मुख्य न्यायाधीश- मतलब पुलिस की जान को खतरा था?

मुख्य न्यायाधीश- हमें नहीं लगता कि यह मुकदमा कभी चलेगा. कोई गवाह सामने लाया जाएगा. कोई बयान देगा. आप खुल कर क्यों नहीं कहते. जो मारे गए हैं उनका वकील कौन होगा? पुलिस के गवाहों से सवाल कौन करेगा. यह मुकदमा होगा या मज़ाक?

मुकुल रोहतगी- अगर आप किसी को नियुक्त करें तो NHRC और HC की कार्रवाई रोक दें. हम कहां-कहां जवाब दें. इस बीच याचिकाकर्ता एमएल शर्मा ने मारे गए आरोपियों के परिवार के लिए मुआवजे की मांग की.

मुख्य न्यायाधीश- हम जांच करवा रहे हैं. इसका मतलब यह नहीं कि उन लोगों पर जो आरोप थे, उनसे हमने आंख बंद कर ली है. लोगों को सच जानने का हक है.

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