महामारी और महामारी के बाद प्रवेश परीक्षा

संदीप पांडेय
कोविड महामारी के समय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों व अन्य अभियांत्रिकी संस्थानों में प्रवेश हेतु कराई जाने वाली प्राथमिक संयुक्त प्रवेश परीक्षा मेंस जिसमें 8,58,273 अभ्यर्थी भाग लेंगे; की तारीखें 1-6 सितंबर, 2020 घोषित करने से देश में एक तेज भावनापूर्ण बहस छिड़ गई है. इसके बाद एक संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड भी होगी, जिसमें उपर्युक्त अभ्यर्थियों में से चयनित दो से ढाई लाख भाग लेंगे. इसके आधार पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों व अन्य संस्थानों में दाखिला सुनिश्चित होगा.

कुछ छात्रों ने न्यायालय जाकर संयुक्त प्रवेश परीक्षा मेंस को स्थगित करने की गुहार लगाई किंतु न्यायालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के परीक्षा कराने के निर्णय को ही ठीक माना. अब छात्र भारतीय जनता पार्टी व सहयोगी दलों के नेताओं के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश में हैं ताकि परीक्षा स्थगित हो सके.


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के कुछ प्रोफेसर कोविड के प्रकोप व खतरे को देखते हुए परीक्षा स्थगित कराना ही ठीक समझते हैं. कुछ का मानना है कि लेना ही है तो दो के बजाए एक चरण में ही परीक्षा ले ली जाए और कुछ रचानात्मक विकल्प भी सुझा रहे हैं. जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुम्बई के प्रोफेसर कनन्न एम. मौदगल्या ने इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक लेख में वकालत की है कि प्रवेश परीक्षा दो वर्ष के लिए स्थगित की जाए लेकिन तब तक छात्र/छात्रा को अपनी पसंद की शाखा में किसी भी अभियांत्रिकी संस्थान में दाखिला दे दिया जाए और वह अध्ययन के लिए गुणवत्तापूर्ण वीडियो कोर्सों का इस्तेमाल करे.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर के भूतपूर्व प्रोफेसर पी.आर.के. राव ने बिना प्रवेश परीक्षा लिए दाखिले का एक तरीका सुझाया है. जो छात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश के इच्छुक होंगे, वे अन्य संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे. इसी तरह जो अन्य संस्थनों में प्रवेश के इच्छुक हैं वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की प्रवेश प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश के इच्छुक छात्र 2 या 3 संस्थानों व 2 शाखाओं का वरीयता क्रम से विकल्प देंगे. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दाखिल छात्रों को यह लिखित आश्वासन देना होगा कि यदि उनका प्रदर्शन निश्चित स्तर से नीचे जाता है तो वे संस्थान छोड़ देंगे. प्रवेश प्रक्रिया पहले-आओ-पहले-पाओ के नियम के अनुसार निश्चित अवधि में पूरी की जाएगी.

वर्तमान में भारत में 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैं. भारत में मुख्य भू-भाग के प्रत्येक राज्य में एक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है, सिवाय उत्तर प्रदेश के जहां दो हैं व पूरे पूर्वोत्तर व सिक्किम के बीच एक गुवाहाटी में है. अखिल भारतीय प्राविधिक शिक्षा परिषद द्वारा भारत में मान्यता प्राप्त कुल 3,289 अभियांत्रिकी संस्थानों में 15,53,809 प्रवेश के लिए स्थान हैं.

आदर्श स्थिति तो वह होगी कि अभियांत्रिकी की शिक्षा ग्रहण करने के इच्छुक किसी भी अभ्यर्थी को निराश न होना पड़े. संयुक्त प्रवेश परीक्षा वर्ष में दो बार होती है. अतः जितने अभ्यर्थी हैं करीब उतने ही प्रवेश हेतु स्थान हैं. यानी बिना किसी को अस्वीकर करने के लिए कराई गई परीक्षा के सभी अभ्यर्थियों को किसी न किसी अभियांत्रिकी संस्थान में दाखिला मिल सकता है.

प्रत्येक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अपने अपने राज्य व गुवाहाटी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पूरे पूर्वोत्तर व सिक्किम में सभी अभियांत्रिकी संस्थानों के प्रवेश स्थानों पर अपने राज्य या क्षेत्र के अभ्यर्थियों को दाखिला दिलाने की जिम्मेदारी ले सकते हैं. उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के सभी अभ्यर्थियों को प्रदेश के 296 अभियांत्रिकी संस्थानों के 1,42,972 प्रवेश स्थानों पर दाखिला दिलाने की जिम्मेदारी कानपुर व काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान ले लें. किसी राज्य में यदि अभ्यर्थियों की संख्या प्रवेश हेतु स्थानों से ज्यादा है तो वे अपनी पसंद के अन्य राज्य के रिक्त स्थान पर दाखिला ले सकते हैं.

यह देखते हुए कि कुल 15,53,809 (जितने प्रवेश हेतु स्थान उपलब्ध हैं) छात्रों को दाखिला दिया जाना है, प्रत्येक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान को औसत 67,557 छात्रों की जिम्मेदारी लेनी होगी. यह मानते हुए कि प्रत्येक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में औसत 200 अध्यापक हैं, प्रत्येक अध्यापक यदि 338 छात्रों का 15 मिनट का ऑनलाइन साक्षात्कार लेता है और दिन के आठ घंटे इस काम में लगाता है तो लगभग साढ़े दस दिनों में सभी छात्रों का साक्षात्कार पूरा हो जाएगा.

इस साक्षात्कार का मुख्य उद्देश्य छात्र/छात्रा की काबिलीयत का अंदाजा लगाना है ताकि उसकी क्षमता के अनुसार उसे संस्थान और उसकी रूचि के अनुसार उसे शाखा आवंटित की जा सके. इसमें यह ध्यान रखना होगा कि प्रत्येक संस्थान में आरक्षित स्थानों पर उस श्रेणी के छात्रों का दाखिला भी निर्धारित संख्या में हो जाए. प्रत्येक संस्थान में पर्याप्त लड़कियों का भी दाखिला हो ताकि लिंग अनुपात जितना बेहतर हो सके बना रहे. संयुक्त प्रवेश परीक्षा मेंस, संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड व अंत में काउंसलिंग द्वारा संस्थान व शाखा के चयन की पूरी प्रकिया का विकल्प यह एक ऑनलाइन साक्षात्कार होगा.

प्रवेश हेतु स्थानों के आवंटन की यह प्रकिया व्यक्तिपरक हो सकती है क्योंकि विभिन्न अध्यापक विभिन्न संस्थानों में विभिन्न छात्र समूहों का साक्षात्कार करेंगे. किंतु प्रत्येक संस्थान के वेबसाइट पर यह जानकारी सार्वजनिक होगी कि किस अध्यापक ने किन छात्र/छात्राओं को स्थान आवंटित किए हैं तो इस बात की सम्भावना कम है कि किसी अपात्र अभ्यार्थी का चयन किया जाएगा. यदि कोई संस्थान व्यक्तिगत साक्षात्कार के बजाए अध्यापकों के एक समूह द्वारा निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहतर समझता है तो वह वैसा भी कर सकता है. हालांकि इसमें समूह द्वारा साक्षात्कार किए जाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ जाएगी.

मुख्य बात यह है कि संस्थान के प्रत्येक अध्यापक की भागीदारी हो ताकि साक्षात्कार की प्रक्रिया का बोझ बांटा जा सके. यदि कोई निर्णय कहीं गलत भी हुआ है तो उसे साल भर बाद सुधारा जा सकता है. जैसे संस्थान के अंदर प्रथम वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर छात्र को शाखा बदलने का मौका मिलता है उसी तरह प्रथम वर्ष के प्रदर्शन के आधार पर छात्रों को संस्थान बदलने का भी मौका दिया जा सकता है. उदाहरण के लिए किसी छात्र को यदि शुरू में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आवंटित नहीं होता तो वह अपनी मेहनत के बल पर एक साल के बाद किसी निजी महाविद्यालय, राज्य अभियांत्रिकी महाविद्यालय अथवा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थानांतरण करा सकता है. पढ़ाई में किसी कमजोर छात्र के लिए इसकी विपरीत प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है.

इस प्रवेश हेतु स्थान के आवंटन की प्रक्रिया में संसाधन, समय व नौकरशाही की खपत बचेगी. इसके अतिरिक्त छात्र/छात्रा अपने घर के नजदीक स्थित संस्थान में पढ़ पाएंगे, जो शिक्षा में पड़ोस के विद्यालय की अवधारणा की तरह है. देश के प्रत्येक क्षेत्र के छात्र/छात्राओं का उचित अनुपात में दाखिला होगा और कोचिंग संस्थानों द्वारा पैदा किया गया असंतुलन दूर होगा.

लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ यह मिलेगा कि धन उगाहने व छात्रों के लिए अनावश्यक मानसिक बोझ उत्पन्न करने वाले कोचिंग संस्थानों से निजात मिलेगी जो हाल ही में देश को समर्पित नई शिक्षा नीति का भी उद्देश्य है. कोचिंग संस्थानों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. हरेक इच्छुक छात्र/छात्रा को अभियांत्रिकी की शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिलेगा. यह शिक्षा के लोकव्यापीकरण के समान है जो हरेक शिक्षाविद का सपना होता है.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसरों की शिकायत कि कोचिंग संस्थानों की मदद से प्रवेश लिए छात्रों की अभियांत्रिकी विषय में रुचि नहीं होती, वे सिर्फ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान का ठप्पा चाहते हैं ताकि वे जीवन में और लुभावनी जगह, जैसे वित्त प्रबंधन क्षेत्र में, पहुंच सकें का भी कुछ हद तक समाधान हो सकेगा. अब समय आ गया है कि हम अपने नवजवानों और नवयुवतियों को वह शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित करें जिस विषय में उनकी रुचि हो, जैसा कि उन देशों में है जहां भारतीय छात्र अध्ययन करने के लिए आकर्षित होते हैं.

प्रस्तावित प्रवेश हेतु स्थान की आवंटन प्रक्रिया का कुछ समय तक अध्ययन कर यह देखा जा सकता है कि यदि वह वर्तमान में होने वाली चयन प्रक्रिया से ज्यादा लाभप्रद है तो उसे लम्बे समय में भी अपनाने के बारे में सोचा जाए.

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