पप्पू भाटिया पर आयकर छापा से राजनेता परेशान?

रायपुर | संवाददाता: शराब कारोबारी पप्पू भाटिया पर आयकर छापे को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. पप्पू को छत्तीसगढ़ सरकार का खासमखास माना जाता रहा है और राज्य के कई प्रभावशाली लोगों के साथ उनके गहरे रिश्ते रहे हैं. इनमें बड़े अफ़सर भी शामिल हैं. ऐसे में आईटी छापों को भाटिया से कम सरकार से जुड़े लोगों से अधिक जोड़ कर देखा जा रहा है. दूर की कौड़ी लाने वालों ने तो बुधवार को भाटिया पर छापेमारी की घटना को राज्य सरकार के भविष्य से भी जोड़ दिया.

शराब कारोबारी बल्देव सिंह भाटिया ऊर्फ पप्पू भाटिया के 24 ठिकानों पर बुधवार को जब एक साथ छापामारी की कार्रवाई शुरु हुई तो लोग चौंक गये. अकेले रायपुर के 12 ठिकानों पर आयकर विभाग के अफसरो ने धावा बोला. इसके बाद आयकर की टीम पप्पू भाटिया के सीए पुखराज जैन के कार्यालय में भी पहुंची.


शराब, फूड प्रोसेसिंग, ब्रिक्स यूनिट समेत कई कारोबार में पप्पू भाटिया और उनके परिजनों के निवेश की जानकारी आयकर टीम को मिली है. छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के अध्यक्ष के बतौर काम करने वाले भाटिया के क्रिकेट संघ से संबंधित दस्तावेज़ भी जब्त किये गये हैं.

यह भी दिलचस्प है कि राज्य में सरकार द्वारा शराब बेचने की शुरुआत के बाद से भाटिया की कंपनी द्वारा बनाये जाने वाले शराब की बिक्री लगातार बढ़ती चली गई थी. आरोप है कि दूसरी शराब कंपनियों को किनारे कर के सरकार के कार्पोरेशन ने भाटिया की कंपनी की शराब को प्राथमिकता दी. भाटिया के रसूख का ही असर रहा कि उनकी कंपनी के बियर ब्रांड की बिक्री तीन प्रतिशत से बढ़ कर 50 प्रतिशत जा पहुंची थी.

आरोप है कि नोटबंदी के दौर में भी राज्य के कई शराब व्यापारियों ने काला-सफेद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कई नेता और अफसरों की काली कमाई शराब व्यापारियों ने सफेद की. हालांकि भाटिया इस खेल में शामिल थे या नहीं, यह पता नही चल पाया है.

बुधवार को छापामारी के दौरान सरकार में शामिल कई राजनेता और अफसर पल-पल की खबर लेते रहे. मंत्रालय और सचिवालय में हर कहीं भाटिया ग्रूप के ठिकानों पर छापा की ही चर्चा होती रही. माना जा रहा है कि भाटिया ग्रूप पर छापा की पूरी रिपोर्ट सामने आने में दो-तीन दिन लग सकते हैं.

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