छत्तीसगढ़ में ठेंगे पर शराबबंदी

रायपुर | संवाददाता : छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी शराबबंदी का वादा कर के सत्ता में आई थी. लेकिन अब राज्य सरकार शराब की बिक्री बढ़ाने के लिये एक के बाद एक नये क़दम उठा रही है.

अब राज्य सरकार ने तय किया है कि वह शराब बिक्री के लिये समय सीमा को और बढ़ायेगी. इसे मंगलवार से लागू भी कर दिया गया है.


गौरतलब है कि भाजपा के शासनकाल में ठेकेदारों द्वारा शराब बिक्री पर रोक लगा दिया गया था. इसके बाद शराब बेचने का काम राज्य सरकार करती रही है.

पिछले शासन काल में शराब दुकान खोलने का समय 12 बजे था. इसी तरह शराब दुकान को बंद करने का समय रात 9 बजे था.

अब कांग्रेस कार्यकाल में सरकार शराब बेचने की समय सीमा में दो घंटे की बढ़ोत्तरी कर दी गई है. रायपुर के कलेक्टर ने अब शराब दुकानों को खोलने का समय 12 के बजाये सुबह 11 बजे कर दिया है.

इसी तरह अब शराब दुकाने रात 9 बजे बंद नहीं होंगी. इसकी जगह शराब दुकानों के बंद होने का समय रात 10 बजे कर दिया गया है.

इससे कुछ समय पहले कांग्रेस पार्टी की सरकार ने शराब बिक्री के लिये और अधिक काउंटर बढ़ाने का निर्णय भी लिया था. इसके अलावा राज्य सरकार ने शराब की बिक्री बढ़ाने के लिये और बड़े लक्ष्य तय किये हैं.

शोध के बाद होगी शराबबंदी

कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में शराबबंदी का वादा किया था. लेकिन सरकार बनने के बाद सरकार अपने वादे से पलट गई.

राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बार-बार दुहराते हैं कि वे नोटबंदी की तर्ज पर शराबबंदी करने के पक्ष में नहीं हैं. इससे कई मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.

मुख्यमंत्री का दावा है कि शराबबंदी के लिये शोध करने के बाद ही इसे राज्य में लागू किया जायेगा. इसके लिये कमेटी भी बनाई जा चुकी है.

हालांकि इससे पहले शराबबंदी के लिये भाजपा सरकार ने भी शोध करवाया था और ऐन विधानसभा चुनाव से पहले इस कमेटी की रिपोर्ट भी आई थी. लेकिन नई सरकार ने इस रिपोर्ट को हास्यास्पद बताते हुये इसे लागू करने से इंकार कर दिया.

संघ को लिखी थी खुली चिट्ठी

भूपेश बघेल ने विपक्ष में रहते हुये सितंबर 2017 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम एक खुली चिट्ठी में संघ और भाजपो को शराब के मुद्दे पर घेरा था.

भूपेश बघेल ने चिट्ठी में लिखा था -आप लाख कहें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजनीति नहीं करती, लेकिन कौन मानेगा? सर्वविदित है कि भारतीय जनता पार्टी संघ की राजनीतिक शाखा है. भाजपा के सारे नेता संघ के नेताओं को गुरु के स्थान पर रखते हैं और गुरुपूर्णिमा पर दक्षिणा देने भी पहुंचते हैं. गाहे- बगाहे वहां संघ की वेशभूषा धारण किए मंचस्थ दिखाई देते हैं.

संघ के कहे बिना वहां भाजपा में पत्ता तक नहीं खड़क सकता. न मंत्री बनाए जा सकते हैं और न हटाए जा सकते हैं. संघ ही भाजपा की राजनीति के लिए रास्ता तय करता है और ज़रूरत पड़ने पर मार्ग बनाता भी है. भाजपा में संघ की सहमति बिना न नीतियां बन सकती हैं और न बदल सकती हैं.

ऐसे में जानने की इच्छा होती है कि शराब पर संघ की क्या नीति है? क्या आप चाहते हैं कि शराब की बिक्री, तस्करी और कालाबाज़ारी जारी रहे और ग़रीब जनता की कमाई का बड़ा हिस्सा शराब में खर्च होता रहे? छत्तीसगढ़ में पारिवारिक कलह की एक बड़ी वजह शराब बन गई है. यही वजह है कि राज्य की सौ प्रतिशत महिलाएं शराब बंदी के पक्ष में खड़ी हैं और संघर्ष कर रही हैं. क्या आप नहीं चाहते कि शराब बंदी हो और परिवार सुख-शांति से रहें, लोग स्वस्थ रहें और कमाई का हिस्सा बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर खर्च हो?

छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख स्वयंसेवक डॉ. पूर्णेन्दू सक्सेना ने कहा कि संघ शराब को ख़राब चीज़ मानता है, लेकिन संघ की ओर से सरकार को कुछ नहीं कहा जाएगा. क्या यही संघ की नीति है? क्यों आपने नहीं सोचा कि क्यों भाजपा के सत्ता पर रहते छत्तीसगढ़ जैसे ग़रीब राज्य में शराब की बिक्री बेतहाशा बढ़ती रही?

अब तो हद हो गई कि रमन सिंह जी के नेतृत्व में चल रही सरकार ने इसी वित्तीय वर्ष से ख़ुद शराब बेचना शुरू कर दिया है. सारे स्वयंसेवक चुप हैं. इससे जनता ने यही समझा है कि संघ सरकार के शराब बेचने के फ़ैसले का समर्थन करता है. क्यों कर रहे हैं स्वयंसेवक शराब बेचने का समर्थन?

छत्तीसगढ़ सरकार ने जब शराब ख़ुद बेचने का फ़ैसला किया, तो एक अख़बार ने सर्वेक्षण करके बताया कि 90 में से 85 विधायक शराब बंदी के पक्ष में हैं. फिर यह चर्चा शुरू हुई कि रमन सिंह सरकार की नज़र शराब से मिलने वाले कमीशन पर है. हमें जानकारी है कि सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कैबिनेट की बैठक में इस फ़ैसले का विरोध किया था. अख़बारों में प्रकाशित हुआ कि एक मंत्री ने यहां तक पूछा कि शराब बेचने से सरकार को साल में 1500 करोड़ रुपये का कमीशन मिलेगा, तो यह कमीशन किसके खाते में जाएगा, सरकार के खाते में या कहीं और?

एक चर्चा यह भी छत्तीसगढ़ में है कि इस कमीशन का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी जा रहा है, जिससे कि संघ के ‘कार्यक्रमों’ को आगे बढ़ाया जा सके और इसीलिए संघ शराब बेचने के सरकार के निर्णय का विरोध नहीं कर रहा है. क्या यही सच्चाई है? हम तो इसमें सच्चाई देखते हैं क्योंकि नान घोटाले की डायरियों में बहुत सा पैसा नागपुर जाने का ज़िक्र आता है, नागपुर किसके पास पैसा जाता है यह तो बच्चा-बच्चा जानता है.

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