हाईवे पर शराबबंदी की काट निकाली

रायपुर | विशेष संवाददाता: कई राज्यों ने हाईवे शराबबंदी की काट निकाल ली है. एक-एक करके राज्य के राजमार्गो को डिनोटिफाई किया जा रहा है ताकि वहां शराब की दुकानें खुल सके. इससे जुड़ा हुआ सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ में भी इस फॉर्मूले को लागू किया जायेगा. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ में शराब बेचने के लिये निगम बनाया गया है लेकिन पूरा जोर लगाने के बावजूद 712 देशी-विदेशी शराब दुकानों में से केवल 354 दुकानें ही शुरु की जा सकी है. आबकारी विभाग का दावा है कि रविवार को और 296 दुकानें खोल ली जायेगी. बाकी के 62 दुकानों के लिये अभी तक जगह नहीं मिल पाई है. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा शराब बेचने का विरोध दिन पर दिन तीखा होता जा रहा है. अबतक राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और चंडीगढ़ ने प्रदेश राजमार्गों को डिनोटिफाइ किया है. संभावना तो यही दिख रही है कि जल्द ही बाकी कई राज्य भी हाईवे को डिनोटिफाइ कर इस फैसले के असर से बच जायेंगे.

महाराष्ट्र की भाजपा सरकार इस फैसले के जवाब में कई बड़े शहरों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों से हाईवे का दर्जा वापस लेने की तैयारी कर रही है. पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की योजना बनाई जा रही है. कई जगहों पर तो इस योजना को अमल में भी लाया जा चुका है. चूंकि अदालत का फैसला हाईवे के 500 मीटर की परिधि में शराब की बिक्री रोकने से जुड़ा हुआ है, ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्गों को डिनोटिफाइ करने से वहां शराब की बिक्री जारी रह सकेगी.


उत्तर प्रदेश में तो कई जगह शराब की दुकानों को 500 मीटर दूर शिफ्ट कर दिया गया है. यूपी लोक निर्माण विभाग भी शहर के अंदर से गुजर रहे स्टेट हाईवे पर बनी शराब की दुकानों को बचाने के लिये यही उपाय अपना रही है. यूपी लोक निर्माण विभाग ने 31 मार्च को एक शासनादेश जारी किया, जिसके तहत शहरों के आंतरिक मार्ग जो स्टेट हाईवे की श्रेणी में आते हैं और उनके बाईपास को अब जिला मार्ग घोषित कर दिया गया है. इसके साथ ही शहर के बाईपास को प्रदेश राजमार्ग घोषित कर दिया गया है.

राज्य सरकारों के अलावा बार और रेस्तरां मालिक भी कई तरह की चालाकियां दिखाकर अदालत द्वारा लगाये गये प्रतिबंध से बचने की कोशिश कर रहे हैं. हाईवे से दूरी बढ़ाने के लिये कई बार और रेस्तरां मालिकों ने अपने यहां का प्रवेश द्वारा बदल दिया है. एंट्री गेट बदलने के बाद हाईवे से उनकी दूरी बढ़ गई है और वे 500 मीटर की परिधि वाले नियम से भी बच गये हैं. कुछ बार मालिकों की दलील है कि अगर उनका साइनबोर्ड हाईवे से नहीं दिखेगा, तो वे इस प्रतिबंध से बच सकते हैं.

महाराष्ट्र में जलगांव नगरपालिका और यवतमाल नगर निगम ने अपने-अपने यहां से होकर गुजरने वाले हाईवे को डिनोटिफाइ कर दिया है. जलगांव नगरपालिका कमिश्नर और यवतमाल नगर निगम के मुख्य अधिकारी ने सरकार को इस कार्रवाई की जानकारी भी दे दी है. इस बदलाव के बाद जलगांव और यवतमाल से होकर गुजरने वाली सड़कों का रखरखाव संबंधित स्थानीय विभाग द्वारा किया जायेगा. पुणे के जिला कलेक्टर सौरभ राव ने भी बताया कि पुणे से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को डिनोटिफाइ करने संबंधी प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है.

पश्चिम बंगाल में भी दो अहम प्रदेश राजमार्गों को डिनोटिफाइ कर दिया गया था. सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई अन्य राजमार्गों के साथ भी यही रणनीति अपनाई जायेगी. 2006 में चंडीगढ़ ने अपनी कई सड़कों को प्रदेश राजमार्ग का दर्जा दे दिया था. नगरपालिका के पास इन सड़कों के रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि ना होने के कारण यह फैसला लिया गया था. सरकार चाहती थी कि इन सड़कों की मरम्मत और रखरखाव में केंद्रीय फंड खर्च हो. फिर जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने वाला था, तब इन राजमार्गों को डिनोटिफाइ कर दिया गया, ताकि अदालत के आदेश का असर यहां ना हो.

दरअसल, शराब से मिलने वाली राजस्व की रकम इतनी बड़ी है कि राज्य सरकारें इसकी भरपाई करने की हालत में नहीं हैं इसीलिये सुप्रीम कोर्ट के फैसले की काट निकाली जा रही है. हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में दी गई एक जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार को शराब से 33 अरब रुपये का राजस्व मिलता है.

पिछले साल याने 2015-16 में शराब की दुकान तथा बार के लाइसेंस से 33 अरब 37 करोड़ 26 लाख 27 हजार 3 सौ 20 रुपये का राजस्व मिला था. इसी तरह से चालू साल में जनवरी 2017 तक सरकार को शराब दुकान तथा बार से 28 अरब 77 करोड़ 98 लाख 92 हजार 084 रुपये का राजस्व मिला है. पिछले साल छत्तीसगढ़ के लोगों ने 12 करोड़ प्रूफ लीटर शराब पी थी इस साल जनवरी तक 10.50 करोड़ प्रूफ लीटर शराब पी जा चुकी है.

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